Last updated: September 8th, 2025 at 04:38 am

कोचस/रोहतास। सेवा स्थायीकरण एवं सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा के अनुरूप वेतनमान की मांग को लेकर कार्यपालक सहायकों का आंदोलन चौथे दिन भी जारी रहा। शनिवार को जिले के सैकड़ों कार्यपालक सहायकों ने जिला मुख्यालय पर जोरदार धरना-प्रदर्शन कर सरकार से अपनी अनदेखी पर जवाब मांगा।
धरना को संबोधित करते हुए संगठन के नेता मुकेश कुमार ने कहा कि बिहार सरकार ने कई संविदा कर्मियों के मानदेय व सुविधाओं में सुधार किया है, लेकिन कार्यपालक सहायकों की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा— “पिछले 15 वर्षों से संविदा की आग में झुलस रहे हैं। सुशासन बाबू अब तो हमारा भी कल्याण कीजिए और सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा के अनुरूप मानदेय का भुगतान कीजिए।”
वहीं, संगठन के जिला सचिव प्रेम प्रकाश पंकज ने बताया कि बिहार राज्य कार्यपालक सहायक सेवा संघ के नेतृत्व में जिले के सभी प्रखंड कार्यालय एवं विभागों में लगभग 700 कार्यपालक सहायक लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों के समर्थन में काला बिल्ला लगाकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आमजन को असुविधा न हो, इसलिए अवकाश के दिन धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया जा रहा है।
सरकार के हर अहम काम में अहम भूमिका
बताते चलें कि कार्यपालक सहायक वर्ष 2010 से बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसाइटी, पटना के अधीन संविदा पर नियोजित हैं। प्रखंड व अंचल स्तर पर जाति, आय, आवासीय, दाखिल-खारिज, म्युटेशन, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), मनरेगा, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, कन्या विवाह, पारिवारिक लाभ, आंगनबाड़ी सहित अधिकांश योजनाओं को अमल में लाने में इनकी भूमिका अहम है।
यही नहीं, आईटी से जुड़ी तमाम सरकारी योजनाओं—भू-सर्वेक्षण महाभियान, निर्वाचन आयोग का विशेष गहन पुनरीक्षण, आधार-राशन कार्ड सिडिंग, 100 प्रतिशत डिजिटाइजेशन अभियान—में भी कार्यपालक सहायकों का योगदान सबसे अहम माना जाता है।
कोविड काल में मिला राष्ट्रीय सम्मान
कोविड-19 के समय प्रवासी एप एवं राशन कार्ड निर्माण में इनकी भूमिका को सराहते हुए बिहार सरकार को डिजिटल इंडिया अवार्ड 2020 और नेशनल ई-गवर्नेंस अवार्ड जैसे राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए। नेताओं ने कहा कि यह कार्यपालक सहायकों की अथक मेहनत और तकनीकी दक्षता का ही परिणाम है।
शांतिपूर्ण आंदोलन से सरकार का ध्यान आकृष्ट करना चाहते हैं
संगठन के नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है। सरकार के विरोध में नहीं, बल्कि ध्यान आकर्षित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह अन्य संविदा कर्मियों को राहत दी गई है, उसी तर्ज पर कार्यपालक सहायकों को भी स्थायीकरण और सातवें वेतन आयोग के अनुरूप मानदेय का लाभ मिलना चाहिए।
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