Last updated: May 8th, 2026 at 06:19 am

बिहार की सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विभागों के बंटवारे ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है। इस बार सिर्फ मंत्री नहीं बदले गए, बल्कि कई अहम विभागों का संतुलन भी बदला गया है, जिसे आने वाले राजनीतिक दौर की तैयारी माना जा रहा है।
सबसे ज्यादा चर्चा स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग को लेकर हो रही है। पहली बार स्वास्थ्य विभाग जनता दल यूनाइटेड (JDU) को मिला है। यह जिम्मेदारी नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को सौंपी गई है। राजनीतिक जानकार इसे जेडीयू की भविष्य की रणनीति और निशांत कुमार की सक्रिय राजनीतिक एंट्री के रूप में देख रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग को आम लोगों से सीधे जुड़ा और बेहद प्रभावशाली माना जाता है। ऐसे में निशांत कुमार को यह जिम्मेदारी देकर पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि उन्हें धीरे-धीरे बड़े नेतृत्व के तौर पर तैयार किया जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने शिक्षा विभाग अपने पास रखकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। बीजेपी नेता मिथिलेश तिवारी को शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। माना जा रहा है कि पार्टी शिक्षा व्यवस्था, नई शिक्षा नीति और युवाओं से जुड़े मुद्दों के जरिए अपनी वैचारिक और राजनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहती है।
ऊर्जा विभाग में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। करीब 30 साल तक इस विभाग को संभालने वाले विजेंद्र प्रसाद यादव से जिम्मेदारी लेकर बुलो मंडल को ऊर्जा मंत्री बनाया गया है। इसे सरकार की नई राजनीतिक और सामाजिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
कोसी और सीमांचल क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए जेडीयू ने बुलो मंडल को बड़ी जिम्मेदारी दी है। वहीं बीजेपी और जेडीयू के बीच विभागों का यह नया बंटवारा संकेत देता है कि एनडीए अब बिहार में नए शक्ति संतुलन के साथ आगे बढ़ना चाहता है।
सम्राट चौधरी सरकार के इस विभागीय फेरबदल ने साफ कर दिया है कि बिहार की राजनीति अब नए नेतृत्व, नई रणनीति और नए समीकरणों की तरफ बढ़ रही है।
![]()
Comments are off for this post.