Last updated: May 11th, 2026 at 03:57 am

हाल के विधानसभा चुनावों में मिली लगातार जीत ने बीजेपी और एनडीए गठबंधन को नई राजनीतिक मजबूती दी है। लोकसभा चुनाव में सीटें कम होने के बाद जो दबाव बना था, उसे राज्यों में मिली सफलता ने काफी हद तक संतुलित कर दिया है। अब इसका असर अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में भी दिखाई देने की संभावना जताई जा रही है।
महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में एनडीए की बढ़ती ताकत ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए उसके समीकरण मजबूत कर दिए हैं। इन राज्यों की विधानसभाओं में गठबंधन की सीटों में हुई बढ़ोतरी निर्वाचक मंडल में सीधे असर डालती है।
राष्ट्रपति चुनाव में कैसे बनता है समीकरण?
राष्ट्रपति चुनाव में संसद के चुने हुए सांसदों और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं। सांसदों और विधायकों के वोट का मूल्य अलग-अलग होता है और राज्यों की आबादी के आधार पर विधायकों के वोटों की ताकत तय की जाती है।
उत्तर प्रदेश इस चुनाव में सबसे अहम राज्य माना जाता है, क्योंकि यहां के विधायकों के वोटों का मूल्य सबसे ज्यादा है। इसके अलावा महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों का भी राष्ट्रपति चुनाव में अहम योगदान रहता है।
विधानसभा जीत से NDA को फायदा
राज्यों में हालिया चुनावी सफलता के बाद एनडीए की स्थिति पहले की तुलना में काफी मजबूत मानी जा रही है। महाराष्ट्र और बिहार में गठबंधन की सीटों में बड़ा इजाफा हुआ है, जबकि पश्चिम बंगाल में भी बीजेपी का प्रभाव पहले से ज्यादा बढ़ा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन राज्यों में बढ़ती ताकत राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
लोकसभा के बाद बदला राजनीतिक माहौल
2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सीटें कम होने के बाद विपक्ष लगातार एनडीए सरकार को कमजोर बता रहा था। हालांकि, उसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी और उसके सहयोगियों की जीत ने राजनीतिक माहौल बदल दिया है। अब पार्टी अपने सहयोगियों के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहले से ज्यादा संतुलित और मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है।
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