Last updated: May 25th, 2026 at 03:34 am

सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आए व्यंग्यात्मक डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) से जुड़ा मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। शीर्ष अदालत में दायर एक याचिका में इस समूह की गतिविधियों और उससे जुड़े आरोपों की जांच कराने की मांग की गई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालत की कार्यवाही के दौरान की गई मौखिक टिप्पणियों का इस्तेमाल प्रचार और व्यावसायिक लाभ के लिए किया जा रहा है। साथ ही उन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है, जो न्यायिक टिप्पणियों को सोशल मीडिया अभियानों में इस्तेमाल कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता ने कथित फर्जी डिग्रियों के सहारे वकालत करने वाले लोगों की जांच की मांग भी उठाई है। इसमें कहा गया है कि न्यायिक प्रक्रिया और अदालत की टिप्पणियों का गलत तरीके से उपयोग गंभीर चिंता का विषय है।
दरअसल, यह विवाद उस समय शुरू हुआ था जब सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील का दर्जा देने से जुड़ी एक सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की कुछ टिप्पणियां चर्चा में आ गई थीं। सुनवाई के दौरान “कॉकरोच” और “परजीवी” जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर सोशल media पर व्यापक बहस शुरू हो गई थी।
हालांकि बाद में मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया था कि उनकी टिप्पणियों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा था कि उनका इशारा केवल उन लोगों की ओर था, जो कथित तौर पर फर्जी और अवैध डिग्रियों के जरिए कानूनी पेशे में प्रवेश कर रहे हैं।
इसी विवाद के बाद सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से एक व्यंग्यात्मक डिजिटल अभियान सामने आया, जिसने कुछ ही दिनों में बड़ी संख्या में लोगों का ध्यान आकर्षित किया। अब इस पूरे मामले को लेकर कानूनी और सामाजिक बहस और तेज हो गई है।
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