Last updated: May 26th, 2026 at 04:28 am

सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में हज यात्रा की औपचारिक शुरुआत हो गई है। सोमवार सुबह से दुनिया भर से आए लाखों मुस्लिम श्रद्धालु पवित्र स्थल मीना पहुंचने लगे, जहां से हज की प्रमुख रस्मों का आरंभ होता है। इस वर्ष करीब 20 लाख जायरीनों के हज में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
‘तरविया दिवस’ से शुरू होती हैं हज की रस्में
मीना पहुंचने वाले श्रद्धालु ‘तरविया दिवस’ मनाते हैं, जिसे हज यात्रा का पहला महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। इस दिन जायरीन इबादत, दुआ और आत्मचिंतन में समय बिताते हैं। श्रद्धालु ‘तल्बिया’ पढ़ते हुए अल्लाह की बंदगी करते हैं और पांचों वक्त की नमाज अदा करते हैं।
परंपरा के अनुसार, इस दिन को आध्यात्मिक तैयारी का दिन माना जाता है, क्योंकि इसके बाद श्रद्धालु अराफात के मैदान की ओर रवाना होते हैं, जिसे हज का सबसे अहम पड़ाव माना जाता है।
अराफात में होगा हज का सबसे बड़ा पड़ाव
धुल-हिज्जा के नौवें दिन जायरीन माउंट अराफात पहुंचेंगे, जहां ‘वुकूफ-ए-अराफात’ की रस्म अदा की जाती है। इस रस्म को हज का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
इसके बाद ईद-उल-अजहा के मौके पर कुर्बानी और ‘जमरात’ की रस्में निभाई जाएंगी, जिसमें प्रतीकात्मक रूप से शैतान को पत्थर मारे जाते हैं।
मीना का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
मीना इस्लामिक इतिहास और हज परंपरा में बेहद खास स्थान रखता है। यह वही इलाका है जहां हज की कई महत्वपूर्ण रस्में अदा की जाती हैं। माना जाता है कि पैगंबर इब्राहीम से जुड़ी कुर्बानी की घटना भी इसी क्षेत्र से संबंधित है।
मक्का और मुज़दलिफ़ा के बीच स्थित यह घाटी हज के दौरान लाखों लोगों की मेजबानी करती है। यहां मौजूद Al-Khaif Mosque का भी विशेष धार्मिक महत्व है, जहां पैगंबर मुहम्मद ने अपना विदाई संदेश दिया था।
हज के लिए सऊदी अरब की विशेष तैयारियां
सऊदी प्रशासन ने इस बार हज यात्रा को सुचारु और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। परिवहन, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर विशेष व्यवस्था की गई है ताकि लाखों श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
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