Last updated: May 26th, 2026 at 02:38 pm

दिल्ली और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में चल रहे “ऑपरेशन गैंग बस्ट” को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अपराधियों तथा गैंग नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे इस विशेष अभियान को भाजपा सरकार कानून व्यवस्था की बड़ी सफलता बता रही है, जबकि विपक्ष इस पर सवाल उठा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार इस अभियान के तहत कई राज्यों की पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए संगठित अपराध से जुड़े संदिग्धों पर कार्रवाई की है। अभियान में गैंगस्टर नेटवर्क, अवैध हथियार सप्लाई और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की जांच की जा रही है। कई जिलों में छापेमारी और गिरफ्तारी की कार्रवाई लगातार जारी है।
सरकार का दावा है कि इस अभियान का उद्देश्य अपराध नेटवर्क को पूरी तरह कमजोर करना और राज्यों में कानून व्यवस्था मजबूत करना है। भाजपा नेताओं का कहना है कि अपराध और माफिया के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत लगातार कार्रवाई की जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार पहले भी माफिया विरोधी अभियान को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करती रही है।
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath सरकार का कहना है कि प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और किसी भी गैंग को कानून व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। दिल्ली पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर कई महत्वपूर्ण इनपुट साझा किए जा रहे हैं।
हालांकि विपक्ष ने इस अभियान को लेकर सवाल खड़े किए हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कानून व्यवस्था का मुद्दा सिर्फ प्रचार तक सीमित नहीं रहना चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि कई मामलों में कार्रवाई का राजनीतिक इस्तेमाल भी किया जाता है। कुछ नेताओं ने निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग की है।
विपक्षी दलों का कहना है कि अपराध नियंत्रण के साथ-साथ बेरोजगारी, सामाजिक असमानता और युवाओं में बढ़ती निराशा जैसे मुद्दों पर भी ध्यान देना जरूरी है। उनका आरोप है कि सरकार केवल पुलिस कार्रवाई को प्रचारित कर रही है, जबकि सामाजिक कारणों पर पर्याप्त काम नहीं हो रहा।
दूसरी तरफ भाजपा नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि पहले अपराधी खुलेआम सक्रिय रहते थे, लेकिन अब सख्त कार्रवाई के कारण कानून व्यवस्था में सुधार आया है। भाजपा इस अभियान को “सुरक्षित समाज” की दिशा में बड़ा कदम बता रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक कानून व्यवस्था हमेशा से यूपी और दिल्ली की राजनीति का अहम मुद्दा रही है। चुनावों के दौरान भी अपराध नियंत्रण और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठते रहे हैं। ऐसे में “ऑपरेशन गैंग बस्ट” को लेकर राजनीतिक बयानबाजी आगे भी जारी रह सकती है।
सोशल मीडिया पर भी इस अभियान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे अपराध के खिलाफ जरूरी कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। इसी वजह से यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा में बना हुआ है।
आने वाले समय में इस अभियान के परिणाम और पुलिस कार्रवाई की रिपोर्ट राजनीतिक बहस को और प्रभावित कर सकती है। फिलहाल भाजपा इसे कानून व्यवस्था की उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, जबकि विपक्ष सरकार के दावों पर सवाल उठाने में लगा हुआ है।
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