Last updated: May 28th, 2026 at 04:04 am

NIA की जांच में दिल्ली के चर्चित IED ब्लास्ट मामले को लेकर कई अहम खुलासे सामने आए हैं। एजेंसी के अनुसार, मामले के मुख्य आरोपी Umar-un-Nabi ने विस्फोटक तैयार करने के लिए जरूरी रसायन खरीदने में फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया था।
जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपी ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से विस्फोटक बनाने की तकनीकों पर लंबे समय तक रिसर्च की थी। इसके साथ ही उसने फरीदाबाद स्थित अपने फ्लैट में अस्थायी लैब बनाकर रासायनिक प्रयोग भी किए थे। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने इलेक्ट्रोलाइसिस तकनीक के जरिए विस्फोटक सामग्री तैयार करने की कोशिश की थी।
NIA को जांच के दौरान मुंबई के एक व्यापारी से जुड़ा डिलीवरी रिकॉर्ड मिला, जिससे रसायनों और तकनीकी उपकरणों की खरीद का सुराग मिला। एजेंसी के अनुसार आरोपी ने एक फर्जी नाम और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए उपकरण मंगवाए थे। भुगतान डिजिटल माध्यम से किया गया था और सामान हरियाणा के एक पते पर डिलीवर कराया गया।
चार्जशीट में दावा किया गया है कि आरोपी ने बाद में और उपकरण खरीदने की भी कोशिश की थी, लेकिन इससे पहले जांच एजेंसियों ने संदिग्ध आतंकी नेटवर्क का पता लगा लिया। मामले की जांच के दौरान कुछ अन्य आरोपियों की भूमिका भी सामने आई है, जिनसे पूछताछ जारी है।
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों ने कट्टरपंथी साहित्य और ऑनलाइन सामग्री का सहारा लेकर विस्फोटक तैयार करने की जानकारी जुटाई थी। जांच के दौरान मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों से कई संदिग्ध दस्तावेज और सामग्री बरामद किए गए हैं।
गौरतलब है कि राजधानी दिल्ली में हुए इस धमाके में कई लोगों की जान गई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। मामले को लेकर NIA ने विस्तृत चार्जशीट दाखिल कर दी है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
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