Last updated: May 28th, 2026 at 04:14 am

जामा मस्जिद श्रीनगर और पुराने शहर के ईदगाह मैदान में इस बार भी ईद की सामूहिक नमाज आयोजित नहीं हो सकी। लगातार आठवें वर्ष प्रशासन द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के बाद इस मुद्दे को लेकर घाटी में चर्चा तेज हो गई है।
धार्मिक नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें नजरबंद किया गया और लोगों को ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों पर ईद की नमाज अदा करने की अनुमति नहीं मिली। उन्होंने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और परंपराओं से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।
मीरवाइज ने कहा कि ईद जैसे बड़े धार्मिक अवसर पर लोगों को पाबंदियों और सुरक्षा घेरों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि लगातार कई वर्षों से ईदगाह और जामा मस्जिद में सामूहिक नमाज नहीं होने से नई पीढ़ी अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से दूर होती जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर के लोगों का इन धार्मिक स्थलों से गहरा आध्यात्मिक जुड़ाव है, जिसे किसी भी प्रकार की रोक या बंदिश से खत्म नहीं किया जा सकता। वहीं प्रशासन की ओर से इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि सुरक्षा कारणों को लेकर घाटी में कई बार विशेष व्यवस्थाएं लागू की जाती रही हैं। गौरतलब है कि श्रीनगर की जामा मस्जिद और ईदगाह ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से कश्मीर के प्रमुख केंद्र माने जाते हैं, जहां पहले बड़ी संख्या में लोग ईद की नमाज के लिए जुटते थे।
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