Last updated: May 28th, 2026 at 05:04 am

ख्वाजा आसिफ के एक बयान ने पाकिस्तान में इतिहास और पहचान को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक इंटरव्यू के दौरान पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा कि देश के लोगों को उनके वास्तविक इतिहास से दूर रखा गया और नई पीढ़ी को अधूरी जानकारी दी जा रही है।
ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान में लंबे समय से यह धारणा बनाई गई कि लोगों की जड़ें अरब या ईरान से जुड़ी हैं, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। उन्होंने कहा कि उपमहाद्वीप के इतिहास और स्थानीय सभ्यताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि इतिहास की किताबों में कई प्राचीन शासकों और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का उल्लेख सीमित कर दिया गया, जिससे नई पीढ़ी अपने अतीत को ठीक से नहीं जान पा रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई युवाओं को भारतीय उपमहाद्वीप के प्राचीन इतिहास के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है।
अपने बयान में ख्वाजा आसिफ ने यह भी स्वीकार किया कि उनके पूर्वज हिंदू थे। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी व्यक्ति की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से उसकी राष्ट्रीय पहचान कैसे बदल सकती है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
पाकिस्तान में इतिहास और शिक्षा व्यवस्था को लेकर पहले भी कई बार बहस होती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया के साझा इतिहास को लेकर दोनों देशों में अलग-अलग दृष्टिकोण देखने को मिलते हैं। ख्वाजा आसिफ के इस बयान के बाद पाकिस्तान में इतिहास, सांस्कृतिक पहचान और शिक्षा नीति को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।
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