Last updated: June 1st, 2026 at 03:59 pm

दुनिया की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। महामारी, भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा संकट और सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने वैश्विक कंपनियों को अपनी उत्पादन रणनीतियों पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया है। इसी बदलते माहौल में भारत एक महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन केंद्र के रूप में तेजी से उभरता दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया की कई बड़ी कंपनियां अब अपने उत्पादन और आपूर्ति नेटवर्क को केवल एक देश पर निर्भर नहीं रखना चाहतीं। इसी कारण “चाइना प्लस वन” रणनीति के तहत भारत को एक प्रमुख विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा, टेक्नोलॉजी और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार भारत का विनिर्माण क्षेत्र मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। मई 2026 में भारत का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो घरेलू मांग और नए ऑर्डरों में बढ़ोतरी का संकेत माना जा रहा है। उद्योग जगत इसे उत्पादन और निवेश गतिविधियों के लिए सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है।
औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े भी भारत की बढ़ती विनिर्माण क्षमता की ओर इशारा कर रहे हैं। अप्रैल 2026 में औद्योगिक उत्पादन में 4.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 6.2 प्रतिशत का विस्तार देखने को मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय उद्योग की मजबूती को दर्शाता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भारत की स्थिति तेजी से मजबूत हुई है। रिपोर्टों के अनुसार 2026 में दुनिया के लगभग 28 प्रतिशत iPhone भारत में असेंबल किए जा सकते हैं। यह बदलाव केवल उत्पादन वृद्धि नहीं बल्कि वैश्विक टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका को भी दर्शाता है।
दुनिया की कई बड़ी टेक कंपनियां भी भारत में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन के बढ़ते उपयोग के कारण वैश्विक कंपनियां अपने भारतीय केंद्रों को केवल बैक-ऑफिस कार्यों तक सीमित नहीं रख रहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर विकास, इंजीनियरिंग और उत्पाद निर्माण जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी सौंप रही हैं।
रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। Rolls-Royce और Hindustan Aeronautics Limited (HAL) के संयुक्त उपक्रम ने तमिलनाडु में अपने विनिर्माण केंद्र का विस्तार किया है। इस परियोजना को भारत की उन्नत एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
टेक्सटाइल और परिधान उद्योग में भी वैश्विक निवेश बढ़ रहा है। हाल ही में वैश्विक परिधान कंपनी Epic Group ने ओडिशा में लगभग 100 मिलियन डॉलर के निवेश के साथ अपना पहला उत्पादन केंद्र शुरू किया। इस परियोजना से हजारों रोजगार अवसर पैदा होने की संभावना जताई गई है।
नीति आयोग के अधिकारियों का कहना है कि भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने के लिए अनुसंधान, नवाचार और घरेलू तकनीक विकास पर और अधिक ध्यान देना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उच्च तकनीक और मूल्यवर्धित विनिर्माण में भी मजबूत उपस्थिति बनानी होगी।
हालांकि चुनौतियां भी मौजूद हैं। वैश्विक सप्लाई चेन में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और कुछ अंतरराष्ट्रीय नीतिगत बदलाव भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकते हैं। उद्योग जगत का मानना है कि लॉजिस्टिक्स, कौशल विकास और तकनीकी निवेश पर निरंतर काम करना आवश्यक होगा।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान निवेश और उत्पादन वृद्धि की गति बनी रहती है, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक सप्लाई चेन का एक प्रमुख स्तंभ बन सकता है। इससे न केवल रोजगार और निर्यात बढ़ेंगे, बल्कि भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति भी और मजबूत होगी।
फिलहाल दुनिया की बड़ी कंपनियों का भारत की ओर बढ़ता रुझान इस बात का संकेत है कि देश केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि भविष्य का एक महत्वपूर्ण वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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