Last updated: June 23rd, 2026 at 05:43 am

बिहार के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता और कार्य में लापरवाही के मामलों को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। शिक्षा मंत्री के निर्देश पर विभाग ने छह वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ एक साथ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।
इस कार्रवाई के तहत एक महिला प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि अन्य अधिकारियों के वेतन, पेंशन और वार्षिक वेतन वृद्धि पर रोक लगाने की अनुशंसा की गई है। इस कदम के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है।
कई जिलों के अधिकारियों पर गंभीर आरोप
विभागीय जांच में सामने आया है कि बांका, सुपौल और अन्य जिलों में तैनात तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) पर कार्य में लापरवाही और नियुक्तियों में अनियमितता के आरोप लगे हैं। कुछ अधिकारी वर्तमान में अन्य जिलों में कार्यरत हैं, जबकि कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
डीपीओ पर बर्खास्तगी की अनुशंसा
सबसे बड़ी कार्रवाई भोजपुर के तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) मो. इरशाद अंसारी के खिलाफ की गई है। उन पर वित्तीय अनियमितता और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप हैं। विभाग ने उनकी सेवा समाप्त करने की अनुशंसा की है। इसके अलावा बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के एक पूर्व सचिव पर भी कर्तव्य में गंभीर लापरवाही के आरोप साबित हुए हैं, जिन पर आगे विभागीय कार्रवाई की जा रही है।
महिला बीईओ निलंबित
मधुबनी जिले के मधेपुर की प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) मरजीना खातून पर छात्रों के प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों में अवैध वसूली के आरोप लगे हैं। जांच के बाद उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया गया है। उनका निलंबन आदेश निर्धारित तिथि से प्रभावी होगा।
शिक्षा विभाग में जीरो टॉलरेंस नीति
सरकार ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस कार्रवाई का उद्देश्य व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। अधिकारियों के खिलाफ इस सख्त कदम को प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बड़ा निर्णय माना जा रहा है, जिसका असर पूरे विभाग में देखने को मिल रहा है।
![]()
Comments are off for this post.