Last updated: November 1st, 2026 at 01:43 pm

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कल्कि धाम के पीठाधीश्वर और धर्मगुरु आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इस मामले में बड़ा दावा करते हुए कहा है कि आजम खान के साथ राजनीतिक साजिश हुई है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए और इशारों-इशारों में अखिलेश यादव को घेरा।
आचार्य प्रमोद कृष्णम का आरोप है कि समाजवादी पार्टी नहीं चाहती थी कि आजम खान विधानसभा चुनाव से पहले जेल से बाहर आएं। उन्होंने दावा किया कि सपा को आशंका थी कि आजम खान कांग्रेस को इतना मजबूत कर सकते हैं कि पार्टी उत्तर प्रदेश में अपने दम पर चुनाव लड़ने की स्थिति में आ जाए।
‘आजम खान के असली दुश्मन उनके अपने घर में हैं’
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि बीजेपी तो आजम खान के सामने खुला राजनीतिक विरोधी है, लेकिन उनके असली दुश्मन उनके अपने घर में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि अभी वह अखिलेश यादव के बारे में कुछ नहीं कहना चाहते, लेकिन समय आने पर पूरी साजिश का पर्दाफाश होगा।
उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य की राहुल गांधी से मुलाकात, आजम खान के परिवार से संपर्क और कांग्रेस की ओर से 200 सीटें मांगने का जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर समाजवादी पार्टी आजम खान की इतनी हमदर्द थी, तो उनकी जेल से रिहाई के समय लखनऊ से पार्टी का कोई बड़ा नेता रामपुर क्यों नहीं पहुंचा?
केंद्रीय एजेंसियों को लेकर भी उठाए सवाल
जब आचार्य प्रमोद कृष्णम से पूछा गया कि केंद्रीय एजेंसियां केंद्र सरकार के अधीन हैं, अखिलेश यादव के नहीं, तो उन्होंने कहा कि असली सवाल यह है कि एजेंसियों को नियंत्रित करने वाले लोग किसकी बात मानते हैं।
उन्होंने इस सवाल पर अखिलेश यादव का नाम लेने से परहेज किया, लेकिन अपने बयान के जरिए सपा नेतृत्व पर संदेह जताया। हालांकि, उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया है।
‘यूपी चुनाव महाभारत की तरह धर्मयुद्ध होगा’
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को महाभारत की तरह धर्मयुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता जिसे चाहेगी, वही मुख्यमंत्री बनेगा। उनके मुताबिक, जिस व्यक्ति का भगवान में विश्वास होगा, वही मुख्यमंत्री बनेगा।
आजम खान की गिरफ्तारी को लेकर उनके इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी चर्चा तेज हो सकती है।
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