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सनातन और महंगाई पर आमने-सामने अखिलेश-केशव मौर्य, संत धीरेंद्र शास्त्री से लेकर मथुरा तक छिड़ी सियासी बहस

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। इस बार विवाद के केंद्र में सनातन धर्म, संतों के बयान, मथुरा की ईदगाह और महंगाई जैसे मुद्दे हैं। एक तरफ उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव पर संत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को लेकर की गई टिप्पणी के लिए निशाना साधा है, तो दूसरी तरफ सपा प्रमुख ने बीजेपी सरकार को महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे पर घेरा है।

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    दरअसल, केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव से संत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर टिप्पणी के लिए माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को सनातन धर्म और संत समाज की चिंता करने की जरूरत नहीं है। मौर्य के मुताबिक, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी भावनाओं के अनुरूप बयान दिया है और संत समाज ने भी उनका समर्थन किया है। उन्होंने अखिलेश की टिप्पणी को निंदनीय बताते हुए उनसे क्षमा मांगने को कहा।

    इतना ही नहीं, केशव मौर्य ने अखिलेश यादव को मथुरा के मुद्दे पर भी चुनौती दे दी। उन्होंने कहा कि अगर सपा प्रमुख को भगवान श्रीकृष्ण और उनकी जन्मभूमि की चिंता है तो उन्हें मंदिर परिसर में स्थित ईदगाह को हटाने के आंदोलन में शामिल होना चाहिए। मौर्य ने दावा किया कि वह इस मुद्दे पर अखिलेश के साथ खड़े होने को तैयार हैं, लेकिन मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति के कारण सपा अध्यक्ष ऐसा नहीं करेंगे।

    वहीं, अखिलेश यादव ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए महंगाई और बेरोजगारी को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों और मुनाफाखोरी के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आम जनता पहले से ही महंगाई का बोझ झेल रही है। अखिलेश ने यह भी आरोप लगाया कि महंगाई से होने वाली कमाई का हिस्सा बीजेपी को चंदे के रूप में मिलता है।

    इसी बीच अखिलेश यादव ने विवादित बयान देने वाले कथावाचकों को लेकर भी आयोजकों और प्रायोजकों को सलाह दी है। उन्होंने कहा कि ऐसे कथाकारों को धार्मिक कार्यक्रमों में मंच नहीं देना चाहिए, जिनकी बातों से समाज में वैमनस्य फैलता हो। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि कुछ लोग धर्म और प्रवचन को व्यवसाय की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए विवादित बयान देते हैं।

    अखिलेश ने आयोजकों को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे कथाकारों को मंच देने के बाद सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा होती है, जिसका सामना स्थानीय आयोजकों को करना पड़ता है।

    कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में सनातन धर्म और संतों के बयानों से शुरू हुई सियासी बयानबाजी अब महंगाई, बेरोजगारी और मथुरा के मुद्दे तक पहुंच गई है। बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।

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