Last updated: July 21st, 2026 at 03:22 pm

बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सरकारी स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सदन में जोरदार चर्चा हुई। विपक्ष ने कई स्कूलों की जर्जर इमारतों, सीमित संसाधनों और छात्रों के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा।
आरजेडी विधायक कुमार सर्वजीत ने कहा कि राज्य के कई स्कूलों की इमारतें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिसके कारण बच्चों को दूसरे गांवों के विद्यालयों में पढ़ाई करनी पड़ रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सभी पंचायतों में स्कूलों की स्थिति का सर्वे कराया जाए और जिन विद्यालयों के भवन जर्जर हैं, उनका जल्द निर्माण कराया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि कई स्कूलों में केवल दो कमरों में बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना मुश्किल हो रहा है। विपक्ष ने सरकार से स्कूलों की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करने और शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार लाने की अपील की।
सदन में उठे सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में सभी पंचायतों में हाई स्कूल स्थापित करने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, कई स्थानों पर जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण सीमित संसाधनों के साथ पढ़ाई शुरू की गई थी ताकि छात्रों की शिक्षा प्रभावित न हो।
मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि कुछ क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की कमी है और सरकार इस दिशा में समीक्षा करेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन स्थानों पर हाई स्कूल के लिए अब तक जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है, वहां अगले छह महीनों के भीतर जमीन की व्यवस्था कर निर्माण प्रक्रिया शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।
सरकार ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम लगातार उठाए जा रहे हैं। आने वाले समय में स्कूलों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
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