Last updated: October 15th, 2026 at 06:29 am
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की ओर से कार्रवाई की सिफारिश के बावजूद बेगूसराय के जिला शिक्षा पदाधिकारी मनोज कुमार को केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। मामला उर्दू, मकतब और मदरसा विद्यालयों में गुरुवार को हाफ-डे शिक्षण कार्य संचालित करने से जुड़े एक कथित भ्रामक व्हाट्सऐप संदेश का है। शिक्षा विभाग ने अधिकारी से स्पष्टीकरण लेने के बाद भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराने की चेतावनी दी और मामले को समाप्त कर दिया।
शिक्षा मंत्री ने सचिव को लिखा था पत्र
शिक्षा विभाग की ओर से 13 अक्टूबर को जारी पत्र के मुताबिक, 13 अगस्त 2026 को शिक्षा मंत्री के कोषांग से इस मामले में पत्र भेजा गया था। इसमें आरोप लगाया गया कि बेगूसराय के जिला शिक्षा पदाधिकारी मनोज कुमार ने व्हाट्सऐप पर ऐसा संदेश प्रसारित किया, जिसमें जिले के सभी उर्दू, मकतब और मदरसा विद्यालयों में गुरुवार को आधे दिन पढ़ाई संचालित करने का निर्देश दिया गया था।
मंत्री की ओर से इस मामले में कार्रवाई की सिफारिश किए जाने के बाद विभाग ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से जवाब मांगा।
DEO ने स्पष्टीकरण में क्या कहा?
मनोज कुमार ने अपने जवाब में बताया कि उर्दू, मकतब और मदरसा विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक उनसे पहले की परंपरा के अनुसार गुरुवार को हाफ-डे शिक्षण व्यवस्था जारी रखने का अनुरोध कर रहे थे। उन्होंने इसी संदर्भ में व्हाट्सऐप ग्रुप में संदेश भेजा था।
अधिकारी के अनुसार, सरकारी विद्यालयों में शनिवार को आधे दिन शिक्षण कार्य संचालित करने का निर्देश था। इसी व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पुराने विद्यालय संचालन की अवधि के आधार पर संदेश लिखा था।
गलती का पता चलने पर हटाया संदेश
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने विभाग को बताया कि गलत संदेश की जानकारी मिलते ही उसे व्हाट्सऐप ग्रुप से हटा दिया गया था। इसके बाद उन्होंने नया संदेश जारी कर स्पष्ट किया कि गुरुवार को भी विद्यालयों का संचालन अन्य कार्यदिवसों की तरह पूरे समय तक होगा। उनके जवाब के अनुसार, फिलहाल जिले के उर्दू, मकतब और मदरसा विद्यालय सामान्य व्यवस्था के तहत संचालित हो रहे हैं।
कार्रवाई की जगह चेतावनी देकर मामला बंद
शिक्षा मंत्री की सिफारिश और अधिकारी के स्पष्टीकरण पर विचार करने के बाद शिक्षा विभाग ने उन्हें भविष्य के लिए चेतावनी जारी की। इसके साथ ही मामले को संचिकास्त कर दिया गया, यानी विभागीय स्तर पर इसे बंद कर दिया गया। इस फैसले के बाद यह मामला चर्चा में है कि कार्रवाई की मांग के बावजूद विभाग ने संबंधित अधिकारी को केवल चेतावनी देकर ही क्यों छोड़ दिया।
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