Last updated: September 5th, 2026 at 12:37 pm

बेगूसराय: बिहार में गंगा के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को बेगूसराय का दौरा किया। करीब दोपहर 3:30 बजे बेगूसराय पहुंचे मुख्यमंत्री के साथ केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय सांसद गिरिराज सिंह भी मौजूद रहे। दोनों ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ उलाव स्थित कैलाशपुर मोड़ पहुंचकर बाढ़ प्रभावित इलाकों की स्थिति देखी।
अधिकारियों से ली राहत-बचाव की जानकारी
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से बाढ़ की स्थिति, प्रभावित इलाकों और राहत-बचाव अभियान की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित लोगों तक तत्काल मदद पहुंचाने और जरूरी प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर जिला प्रशासन भी सक्रिय रहा। निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री के आईओसीएल गेस्ट हाउस पहुंचकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करने की जानकारी दी गई। बैठक में राहत सामग्री, आवागमन, स्वास्थ्य सेवाओं, पशु चारे और अन्य आवश्यक सुविधाओं की स्थिति पर चर्चा होने की उम्मीद है।
गंगा में पानी के भारी प्रवाह पर सीएम की चिंता
बाढ़ का जायजा लेने के बाद सम्राट चौधरी ने कहा कि फिलहाल गंगा नदी में करीब 20 लाख क्यूसेक पानी गुजर रहा है। वहीं, बॉर्डर से सोन नदी में करीब साढ़े पांच लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की बात उन्होंने कही। मुख्यमंत्री ने इसे चिंता का विषय बताते हुए कहा कि प्रशासन सभी प्रभावित क्षेत्रों में पूरी तरह सतर्क है और लोगों तक आवश्यक सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
गंगा के बाढ़ प्रभाव को कम करने की तैयारी
सम्राट चौधरी ने कहा कि बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में काम शुरू किया गया है। उन्होंने बताया कि सरकार पहले से कोसी और गंडक नदी से जुड़े कार्यों पर काम कर रही है, जबकि अब गंगा के तटबंधों को भी मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को गंगा के तटबंधों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। जरूरत वाले इलाकों में रिंग बांध और नए स्पर बनाए जाने की बात भी उन्होंने कही।
20 किलोमीटर तक फैल रहा पानी
मुख्यमंत्री के मुताबिक कई इलाकों में गंगा का पानी करीब 20-20 किलोमीटर तक फैल रहा है। सरकार का लक्ष्य पानी के इस फैलाव को नियंत्रित और व्यवस्थित करना है, ताकि बाढ़ का असर कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि इससे बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने के साथ नदी में जमा होने वाली गाद की समस्या से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
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