Last updated: August 22nd, 2026 at 12:36 pm

पटना: बिहार में प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता एजाज अहमद ने एनडीए सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अधिकारियों के लिए बार-बार प्रोटोकॉल और प्रशासनिक नियमों का पालन करने संबंधी निर्देश जारी किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर इनका प्रभाव नजर नहीं आता।
बैठकों में अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर सवाल
एजाज अहमद का आरोप है कि कई जगहों पर सांसदों, विधायकों और पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों की ओर से बुलाई गई बैठकों में संबंधित अधिकारी मौजूद नहीं होते। उनके मुताबिक, अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण महत्वपूर्ण बैठकें तक स्थगित या रद्द करनी पड़ती हैं।
RJD नेता ने कहा कि अगर जनप्रतिनिधियों की ओर से बुलाई गई बैठकों को अधिकारी गंभीरता से नहीं लेते हैं, तो इससे प्रशासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच समन्वय पर सवाल खड़े होते हैं।
सरकार पर लगाया संरक्षण देने का आरोप
एजाज अहमद ने आरोप लगाया कि केवल सरकारी स्तर पर पत्र जारी करने से प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है। उनका दावा है कि कुछ अधिकारियों को राजनीतिक संरक्षण मिलने के कारण वे जनप्रतिनिधियों के साथ तय प्रोटोकॉल का पालन करने में भी लापरवाही बरत रहे हैं।
उन्होंने एनडीए सरकार से सवाल किया कि जब जनप्रतिनिधियों के सम्मान और प्रोटोकॉल को लेकर स्पष्ट निर्देश मौजूद हैं, तो फिर उनका पालन सुनिश्चित क्यों नहीं कराया जा रहा है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर जताई चिंता
RJD नेता ने कहा कि सांसद, विधायक और पंचायती राज प्रतिनिधि जनता के चुने हुए प्रतिनिधि होते हैं। ऐसे में उनके साथ निर्धारित सम्मान और प्रोटोकॉल का पालन होना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासनिक स्तर पर इस तरह की शिकायतें लगातार सामने आती रहीं, तो इससे लोगों के बीच शासन व्यवस्था को लेकर गलत संदेश जा सकता है।
एजाज अहमद ने सरकार से अधिकारियों की कार्यशैली की समीक्षा करने और जनप्रतिनिधियों से जुड़े प्रोटोकॉल को प्रभावी तरीके से लागू कराने की मांग की। हालांकि, ये आरोप RJD नेता की ओर से लगाए गए हैं और इस संबंध में सरकार या संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
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