Last updated: May 31st, 2026 at 02:48 pm

विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। ऐसे समय में BRICS समूह का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से शुरू हुआ यह संगठन अब वैश्विक स्तर पर एक प्रभावशाली मंच के रूप में देखा जाता है। हाल के वर्षों में भारत ने इस मंच पर अपनी भूमिका को और मजबूत किया है, जिससे उसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और प्रभाव दोनों में वृद्धि हुई है।
भारत लंबे समय से बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का समर्थन करता रहा है। उसका मानना है कि वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़नी चाहिए। BRICS इसी सोच को आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। यहां भारत न केवल अपने राष्ट्रीय हितों की बात करता है, बल्कि उन देशों की चिंताओं को भी उठाता है जिन्हें अक्सर वैश्विक निर्णयों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलता।
आज दुनिया की बड़ी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा BRICS देशों में मौजूद है। यही कारण है कि इस संगठन के निर्णयों और बैठकों पर पूरी दुनिया की नजर रहती है। भारत इस समूह में अपनी आर्थिक क्षमता, जनसंख्या और बढ़ते वैश्विक प्रभाव के कारण एक प्रमुख सदस्य के रूप में उभरा है।
आर्थिक सहयोग BRICS का सबसे महत्वपूर्ण पहलू माना जाता है। भारत लगातार सदस्य देशों के साथ व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर में BRICS देशों के बीच बढ़ता सहयोग सदस्य देशों को नए अवसर प्रदान कर सकता है।
ऊर्जा सुरक्षा भी उन प्रमुख विषयों में शामिल है जिन पर BRICS देशों के बीच चर्चा होती है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और उसकी ऊर्जा आवश्यकताएं भी लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में ऊर्जा सहयोग को भारत के लिए विशेष महत्व का विषय माना जाता है।
इसके अलावा तकनीक, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भी BRICS देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं। भारत इन सभी क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है और विकासशील देशों के हितों को सामने रखने का प्रयास कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि BRICS भारत को अपनी कूटनीतिक क्षमता दिखाने का एक बड़ा मंच प्रदान करता है। यहां भारत पश्चिमी देशों और विकासशील देशों के बीच संतुलन बनाते हुए अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को आगे बढ़ा सकता है। यही वजह है कि भारत की भागीदारी को वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है।
हाल के वर्षों में BRICS के विस्तार को लेकर भी चर्चा बढ़ी है। नए देशों के शामिल होने से संगठन का दायरा और प्रभाव दोनों बढ़े हैं। भारत इस विस्तार को ऐसे अवसर के रूप में देख रहा है जिससे वैश्विक दक्षिण की आवाज और मजबूत हो सके।
आम भारतीयों के लिए BRICS भले ही एक अंतरराष्ट्रीय मंच हो, लेकिन इसके प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक प्रतिष्ठा पर दिखाई देते हैं। मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां भारत के विकास लक्ष्यों को हासिल करने में मदद कर सकती हैं।
आने वाले वर्षों में BRICS की भूमिका और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में भारत की सक्रिय भागीदारी न केवल उसके राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाएगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर उसकी स्थिति को भी और मजबूत करेगी।
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