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चंपारण में तटबंध टूटने पर पप्पू यादव ने सरकार को घेरा, जांच और कार्रवाई की मांग

चंपारण में तटबंध के तीन अलग-अलग स्थानों पर टूटने के बाद बाढ़ की स्थिति और सरकारी तैयारियों को लेकर सांसद
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चंपारण में तटबंध के तीन अलग-अलग स्थानों पर टूटने के बाद बाढ़ की स्थिति और सरकारी तैयारियों को लेकर सांसद पप्पू यादव ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने बगहा पहुंचकर क्षतिग्रस्त तटबंध का जायजा लिया और घटना के लिए जिम्मेदार अभियंताओं व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

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    हर साल खर्च के बावजूद क्यों टूट रहे तटबंध?

    पप्पू यादव ने कहा कि बाढ़ और कटाव से बचाव के नाम पर हर साल एंटी-एरोजन और फ्लड फाइटिंग कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद तटबंधों का टूटना सरकारी तैयारियों और काम की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है।

    उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2024 के बाद अब 2026 में भी तटबंध टूटने से वाल्मीकिनगर, बगहा और आसपास के इलाकों में लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं। उनके मुताबिक, हर साल बाढ़ के कारण बड़े क्षेत्र में खेती प्रभावित होती है और हजारों एकड़ फसल को नुकसान पहुंचता है।

    गाइड बांध और ठोकर निर्माण की मांग

    सांसद ने तटबंधों की सुरक्षा के लिए गाइड बांध और ठोकर निर्माण कराने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने नदी में जमा गाद यानी सिल्ट की समस्या के समाधान पर भी काम करने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि केवल बाढ़ आने के बाद राहत देने के बजाय तटबंधों को मजबूत करने और नदी के बहाव से जुड़े स्थायी उपायों पर पहले से काम किया जाना चाहिए।

    राहत व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

    पप्पू यादव ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने प्रभावित लोगों के लिए पर्याप्त नाव, मेडिकल सुविधाएं और कम्युनिटी किचन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।

    उन्होंने वर्ष 2024 और 2026 में तटबंध टूटने की उच्चस्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

    राष्ट्रीय आपदा क्षेत्र घोषित करने की मांग

    पप्पू यादव ने वाल्मीकिनगर और बगहा क्षेत्र को राष्ट्रीय आपदा क्षेत्र घोषित करने की मांग भी रखी। उन्होंने बाढ़ प्रभावित किसानों के पांच साल के ऋण माफ करने और फसल व अन्य नुकसान का उचित मुआवजा देने की बात कही।

    सांसद ने सुझाव दिया कि बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन ड्रोन और AI तकनीक के जरिए कराया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों तक जल्द राहत और क्षतिपूर्ति पहुंचाई जा सके।

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