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कश्मीर की आध्यात्मिक विरासत को दुनिया तक पहुंचाना जरूरी: दरख्शां अंद्राबी, शेख-उल-आलम की जीवनी ‘Apostle of Light’ जारी

चरार-ए-शरीफ: जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन डॉ. सैयद दरख्शां अंद्राबी ने कश्मीर की समृद्ध ऋषि-सूफी परंपरा और आध्यात्मिक विरासत को
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चरार-ए-शरीफ: जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन डॉ. सैयद दरख्शां अंद्राबी ने कश्मीर की समृद्ध ऋषि-सूफी परंपरा और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया है। गुरुवार को बडगाम जिले के चरार-ए-शरीफ में उन्होंने प्रसिद्ध सूफी संत शेख-उल-आलम शेख नूर-उद-दीन नूरानी के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित अंग्रेजी पुस्तक ‘Apostle of Light’ का विमोचन किया।

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    यह जीवनी लेखक बाबा गुलाम नबी अदफर ने लिखी है। पुस्तक का विमोचन जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड के शेख-उल-आलम कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित एक साहित्यिक और शैक्षणिक कार्यक्रम के दौरान किया गया। कार्यक्रम का आयोजन ‘कश्मीर मरकज-ए-अदब-ओ-सकाफत’ ने किया था।

    शेख-उल-आलम की शिक्षाओं को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर

    पुस्तक विमोचन के दौरान डॉ. दरख्शां अंद्राबी ने लेखक की सराहना करते हुए कहा कि शेख-उल-आलम के जीवन और उनके संदेश को अंग्रेजी में दर्ज करना कश्मीर की आध्यात्मिक परंपरा को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

    उन्होंने कहा कि कश्मीर की ऋषि-सूफी परंपरा आध्यात्मिक ज्ञान, करुणा और सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों से समृद्ध रही है। शेख-उल-आलम का जीवन और उनकी शिक्षाएं इस परंपरा का प्रतिनिधित्व करती हैं।

    डॉ. अंद्राबी ने कहा, “हमें दुनिया को अपनी आध्यात्मिक उत्कृष्टता की कहानी बतानी चाहिए।” उन्होंने इस विरासत को संरक्षित करने, उसका दस्तावेजीकरण करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने को सामूहिक जिम्मेदारी बताया।

    शांति, सद्भाव और मानवता का संदेश

    वक्फ बोर्ड की चेयरपर्सन ने कहा कि शेख-उल-आलम की शिक्षाएं किसी एक भौगोलिक क्षेत्र, सामाजिक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं हैं। उनके अनुसार, आध्यात्मिकता, विनम्रता, करुणा, मानवीय गरिमा और ईश्वर के प्रति समर्पण जैसे मूल्य आज भी प्रासंगिक हैं।

    उन्होंने कहा कि संतों और आध्यात्मिक गुरुओं ने शांति, सहिष्णुता, सह-अस्तित्व और मानवता की सेवा का संदेश दिया है। इस योगदान को केवल स्थानीय स्मृतियों तक सीमित रखने के बजाय दुनिया भर के पाठकों, शोधकर्ताओं और विद्वानों तक पहुंचाने की जरूरत है।

    डॉ. अंद्राबी ने विशेष रूप से अंग्रेजी जैसी भाषाओं में कश्मीर की आध्यात्मिक और बौद्धिक परंपराओं के अनुवाद तथा दस्तावेजीकरण पर जोर दिया। इससे जम्मू-कश्मीर के बाहर के लोग भी क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और उसके विचारों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।

    साहित्यिक और शैक्षणिक जगत की हस्तियां रहीं मौजूद

    पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में कई विद्वानों, लेखकों और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया। इनमें प्रोफेसर जी. एन. खाकी, डॉ. सतीश विमल और गुलाम हसन तालिब शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध लेखक इनायत गुल ने किया, जिन्होंने स्वागत भाषण भी दिया।

    डॉ. दरख्शां अंद्राबी ने पुस्तक के लेखक बाबा गुलाम नबी अदफर को इस प्रयास के लिए बधाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘Apostle of Light’ कश्मीर की ऋषि-सूफी परंपरा के संतों के जीवन और योगदान पर आगे और शोध तथा साहित्यिक कार्यों को प्रोत्साहित करेगी।

    पुस्तक के विमोचन के साथ कश्मीर की आध्यात्मिक विरासत को साहित्य के माध्यम से व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने और नई पीढ़ी को इस परंपरा से परिचित कराने के प्रयास को भी रेखांकित किया गया।

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