Last updated: July 22nd, 2026 at 11:24 am

संसद मार्च के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही, घटना से जुड़े सभी CCTV फुटेज और बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने के आदेश भी दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पुलिस अपना जवाब निर्धारित समय के भीतर दाखिल करे। इसके बाद याचिकाकर्ता को भी जवाब दाखिल करने का अवसर दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दावा किया गया कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन बिना पूर्व चेतावनी के पुलिस ने लाठीचार्ज किया। याचिका में आरोप लगाया गया कि कार्रवाई के दौरान कई छात्र-छात्राएं घायल हुए और कुछ छात्राओं के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार भी किया गया। याचिकाकर्ता ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और स्वतंत्र जांच की मांग की।
याचिकाकर्ता के वकीलों ने अदालत से कहा कि घटना के सभी वीडियो, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए गए बल से जुड़े साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए, ताकि निष्पक्ष जांच संभव हो सके। उनका दावा था कि 90 से अधिक छात्र घायल हुए हैं और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए।
वहीं, केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी भी घायल हुए और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। उनका कहना था कि जब भीड़ हिंसक हो जाती है तो कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को आवश्यक कार्रवाई करनी पड़ती है।
इसी सुनवाई के दौरान अदालत ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाने की पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली अलग जनहित याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि, संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले में सुनवाई जारी रहेगी।
![]()
Comments are off for this post.