Last updated: July 19th, 2026 at 11:42 am

सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग पर दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल भेजने की आवश्यकता नहीं है और चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी रहना चाहिए।
पत्नी की याचिका पर कोर्ट का फैसला
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सफदरजंग अस्पताल पर भरोसा न होने की बात कही थी। उन्होंने मांग की थी कि वांगचुक को उनकी पसंद के किसी निजी अस्पताल में भर्ती कराया जाए। हालांकि, अदालत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और कहा कि फिलहाल सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों पर भरोसा किया जाना चाहिए।
सुनवाई में दोनों पक्षों ने रखे तर्क
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि वांगचुक को अपने वकीलों और निजी डॉक्टरों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि वांगचुक अपने पसंदीदा अस्पताल में इलाज कराना चाहते हैं।
वहीं, केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि लगातार भूख हड़ताल के कारण वांगचुक की तबीयत बिगड़ रही थी। स्वास्थ्य संबंधी जोखिम को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना जरूरी था ताकि समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
कोर्ट ने स्वास्थ्य सुरक्षा को बताया प्राथमिकता
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध तथ्यों से यह नहीं लगता कि अस्पताल में भर्ती कराने का फैसला मनमाना था। कोर्ट ने माना कि सरकार ने स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया और चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
स्वास्थ्य की स्थिति स्थिर
सफदरजंग अस्पताल की ओर से जारी स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार, सोनम वांगचुक के महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतक फिलहाल स्थिर हैं। हालांकि, शरीर में डिहाइड्रेशन और कुछ ब्लड पैरामीटर्स में बदलाव देखा गया है। डॉक्टरों ने उन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी में रखने की आवश्यकता बताई है।
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