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गुरेज में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भूख हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, गर्भवती महिला की मौत की जांच की मांग

उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले की गुरेज घाटी में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर स्थानीय लोगों की भूख
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उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले की गुरेज घाटी में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग को लेकर स्थानीय लोगों की भूख हड़ताल शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रही। प्रदर्शनकारी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति, ऑपरेशन थिएटर और ब्लड बैंक को चालू करने के साथ 30 वर्षीय गर्भवती महिला हसीना बेगम और उनके मृत जन्मे बच्चे की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

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    प्रदर्शनकारियों का कहना है कि गुरेज घाटी के दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। खासकर आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर इलाज उपलब्ध नहीं होने से मरीजों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं।

    गुरेज में एम्बुलेंस और विशेषज्ञ डॉक्टरों की मांग

    स्थानीय लोगों ने बागतोर, तुलाईल और दावर जैसे इलाकों में फोर-व्हील-ड्राइव एम्बुलेंस तैनात करने की मांग की है। उनका कहना है कि पहाड़ी और दुर्गम रास्तों वाले क्षेत्रों में सामान्य परिवहन व्यवस्था के भरोसे आपातकालीन मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो सकता है।

    प्रदर्शनकारियों ने उप-जिला अस्पताल (SDH) गुरेज में स्थायी स्त्री रोग विशेषज्ञ और रेडियोलॉजिस्ट नियुक्त करने की भी मांग उठाई है। उनके मुताबिक, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता से गर्भवती महिलाओं समेत अन्य मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार मिल सकेगा।

    इसके अलावा अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर और ब्लड बैंक को पूरी तरह चालू करने की मांग की गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होने से गंभीर मरीजों को इलाज के लिए दूर के अस्पतालों में रेफर करने की जरूरत कम हो सकती है।

    हसीना बेगम और उनके बच्चे की मौत की जांच की मांग

    यह आंदोलन 14 अक्टूबर को तुलाईल के मजगुंड गांव की 30 वर्षीय गर्भवती महिला हसीना बेगम और उनके मृत जन्मे बच्चे की मौत के बाद शुरू हुआ। प्रदर्शनकारी मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच चाहते हैं।

    उनकी मांग है कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। हालांकि, प्रदर्शनकारियों की मांग अपने आप में किसी की लापरवाही साबित नहीं करती; इसके लिए जांच के निष्कर्ष जरूरी होंगे।

    स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव की मांग भी की है। उनका आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी बनी हुई है और इसका सबसे अधिक असर दूरदराज के गांवों में रहने वाले लोगों पर पड़ता है।

    ‘इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर हैं लोग’

    प्रदर्शन के दौरान स्थानीय निवासी निसार अहमद लोन ने कहा कि गुरेज के लोग लंबे समय से बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनके मुताबिक अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

    लोन ने अधिकारियों से स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और एम्बुलेंस सेवाओं में सुधार के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बुनियादी और आपातकालीन इलाज के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए।

    एक अन्य प्रदर्शनकारी ने कहा कि हसीना बेगम और उनके बच्चे की मौत ने दूरदराज के इलाके में चिकित्सा सहायता हासिल करने से जुड़ी समस्याओं को फिर सामने ला दिया है। उनके मुताबिक, स्थानीय लोगों की मांग है कि क्षेत्र में जरूरी डॉक्टर, चिकित्सा उपकरण और आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।

    स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार होने तक आंदोलन जारी रखने की बात

    प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांगें केवल एक घटना की जांच तक सीमित नहीं हैं। वे गुरेज घाटी की स्वास्थ्य व्यवस्था में स्थायी सुधार, जवाबदेही और बेहतर आपातकालीन सेवाएं चाहते हैं।

    स्थानीय लोगों ने प्रशासन से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की अपील की है। फिलहाल, भूख हड़ताल के दूसरे दिन भी प्रदर्शनकारियों का जोर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने और हसीना बेगम व उनके बच्चे की मौत की जांच सुनिश्चित कराने पर बना हुआ है।

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