Last updated: July 8th, 2026 at 04:31 am

भारत और इंडोनेशिया के बीच रणनीतिक सहयोग को नई मजबूती मिली है। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, रक्षा और आर्थिक साझेदारी को विस्तार देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति जताई है। इनमें मलक्का जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार पर स्थित सबांग पोर्ट के विकास और इंडोनेशिया को ब्रह्मोस व अस्त्र मिसाइल प्रणाली उपलब्ध कराने जैसे अहम फैसले शामिल हैं।
सबांग पोर्ट का संयुक्त विकास भारत की समुद्री रणनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह बंदरगाह मलक्का जलडमरूमध्य के बेहद करीब स्थित है, जहां से वैश्विक समुद्री व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में भारत की सक्रिय भागीदारी हिंद-प्रशांत में उसकी मौजूदगी को और मजबूत करेगी।
रक्षा सहयोग के तहत भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और अस्त्र मिसाइल प्रणाली को लेकर भी सहमति बनी है। माना जा रहा है कि दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव के बीच यह रक्षा साझेदारी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
दोनों देशों ने डिजिटल सहयोग को भी नई दिशा देने का फैसला किया है। भारत के यूपीआई भुगतान प्रणाली को इंडोनेशिया के डिजिटल भुगतान नेटवर्क से जोड़ने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और दूरसंचार क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। साथ ही भारत इंडोनेशिया को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) तकनीक और चुनावी प्रक्रियाओं में भी सहयोग देगा।
स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर दोनों देशों ने सहमति जताई है। भारत की किफायती दवाइयों की उपलब्धता, स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण, टिकाऊ कृषि तकनीक, उन्नत गेहूं बीज और खाद्य सुरक्षा से जुड़े अनुभव इंडोनेशिया के साथ साझा किए जाएंगे। इसके अलावा भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) बेंगलुरु का परिसर इंडोनेशिया में स्थापित करने की घोषणा भी की गई है।
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रोबोवो सुबियांतो ने भारत की कई जनकल्याणकारी और विकास योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि उनका देश भारतीय मॉडल से सीख लेकर कई कार्यक्रम लागू कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को भविष्य की साझेदारी का मजबूत आधार बताया।
भारत और इंडोनेशिया के बीच हुए ये समझौते केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक संतुलन, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग के नए अध्याय के रूप में भी देखे जा रहे हैं।
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