Last updated: May 21st, 2026 at 05:04 am

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को आतंकवाद और मानवाधिकार मामलों पर कड़े शब्दों में घेरा। नागरिकों की सुरक्षा को लेकर आयोजित वैश्विक बहस के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने पाकिस्तान के रिकॉर्ड पर गंभीर सवाल उठाते हुए उसे दुनिया के सामने बेनकाब करने की कोशिश की।
भारत ने साफ कहा कि जो देश आतंकवाद को समर्थन देते हैं या उसे संरक्षण प्रदान करते हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। भारतीय प्रतिनिधि ने यह भी दोहराया कि भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद का सामना कर रहा है, जिसने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को प्रभावित किया है।
संयुक्त राष्ट्र में बोलते हुए राजदूत पर्वतनेनी ने संघर्ष वाले इलाकों में लगातार बढ़ रही नागरिक मौतों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अस्पतालों, स्कूलों और आम नागरिकों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। साथ ही शहरी क्षेत्रों में ड्रोन और विस्फोटक हथियारों के बढ़ते इस्तेमाल को भी गंभीर खतरा बताया।
भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक सैन्य तकनीकों के उपयोग पर भी अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन की जरूरत बताई। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि नई तकनीकों का इस्तेमाल मानवीय सिद्धांतों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत ही होना चाहिए।
बहस के दौरान जब पाकिस्तान ने भारत के आंतरिक मामलों का मुद्दा उठाने की कोशिश की, तब भारत ने तीखा जवाब दिया। भारतीय दूत ने कहा कि जिस देश का खुद का इतिहास हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों से जुड़ा रहा हो, उसे दूसरों के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
भारत ने अफगानिस्तान में सीमा पार हिंसा का मुद्दा उठाते हुए संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) की रिपोर्ट का हवाला दिया। भारतीय पक्ष के अनुसार, रिपोर्ट में अफगानिस्तान में हुई कई हिंसक घटनाओं के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को जिम्मेदार बताया गया है।
इसके अलावा भारत ने काबुल के एक अस्पताल पर हुए कथित हवाई हमले का भी उल्लेख किया और कहा कि किसी भी परिस्थिति में अस्पतालों या आम नागरिकों को निशाना बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
भारत ने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का जिक्र करते हुए पाकिस्तान के पुराने रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि इतिहास में हुए मानवाधिकार उल्लंघनों को दुनिया भूली नहीं है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब ऐसे मामलों को गंभीरता से देख रहा है।
अंत में भारत ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि युद्ध और संघर्ष की परिस्थितियों में नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर सख्त और एकजुट कार्रवाई हो।
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