Last updated: September 1st, 2026 at 10:42 am

जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने और लंबित जांच पर रोक लगाने की बात कही है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी कहा कि यदि दूसरे राज्यों में इसी घटनाक्रम से संबंधित एफआईआर दर्ज हैं और उनकी जानकारी अदालत के सामने नहीं आई है, तो उन मामलों में भी कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया जा सकता है।
कई राज्यों में दर्ज हुई थीं एफआईआर
अदालत के सामने दिल्ली, महाराष्ट्र, असम, बिहार और पश्चिम बंगाल से संबंधित आवेदन रखे गए, जिनमें आंदोलन से जुड़े मामलों और एफआईआर की जानकारी दी गई थी। बताया गया कि 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रदर्शन किया था। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने 13 एफआईआर दर्ज की थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल विरोध प्रदर्शन में शामिल होना अपने आप में अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जिन राज्यों में इसी मामले से जुड़ी अन्य एफआईआर हैं, वहां भी जांच आगे न बढ़ाई जाए।
2,873 लोगों को लेकर क्या कहा कोर्ट ने?
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि दिल्ली पुलिस पुराने आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों के खिलाफ अलग से एफआईआर दर्ज कर सकती है। इस पर कोर्ट ने कहा कि नई एफआईआर दर्ज करने को लेकर स्थिति स्पष्ट रखी जाए और सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए समान दिशा-निर्देश लागू किए जाएं।
NEET 2026 से जुड़े मामलों में मुआवजे का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने NEET 2026 से जुड़े मामलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे को लेकर भी अहम निर्देश दिया। अदालत को बताया गया कि मुआवजे से संबंधित नीति तीन महीने के भीतर तैयार की जाएगी। कोर्ट ने इस प्रक्रिया को निर्धारित समय सीमा में पूरा कर प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने का निर्देश दिया।
आंदोलन वापस लेने का भरोसा
सुनवाई के दौरान सौरभ दास भी अदालत में मौजूद थे। उन्होंने आंदोलन वापस लेने का भरोसा दिया और अदालत के प्रति आभार जताया। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने उन्हें शुभकामनाएं दीं।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद जंतर-मंतर छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में कार्रवाई को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। साथ ही, अदालत के निर्देश से अन्य राज्यों में दर्ज संबंधित मामलों पर भी असर पड़ने की संभावना है।
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