Last updated: November 7th, 2026 at 06:06 am

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा 2023 को लेकर हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है। गुरुवार, 6 नवंबर को न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने राज्य सरकार की ओर से परीक्षा रद्द करने के जारी आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट के इस फैसले से परीक्षा में सफल हुए हजारों उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है। अब अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर उम्मीदें फिर बढ़ गई हैं।
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, JSSC CGL-2023 परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक और बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप सामने आए थे। इन आरोपों के बाद राज्य सरकार ने 18 अगस्त को अधिसूचना जारी कर पूरी परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया था। सरकार के इस निर्णय से परीक्षा पास कर चुके अभ्यर्थियों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए थे।
सरकार के आदेश के खिलाफ कई सफल उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिकाकर्ताओं ने परीक्षा रद्द करने के फैसले को चुनौती देते हुए इसे अनुचित बताया था।
अभ्यर्थियों को पक्ष रखने का मौका नहीं देने पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि परीक्षा रद्द करने से पहले सफल अभ्यर्थियों को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया। उनका कहना था कि कुछ लोगों पर लगे अनियमितता के आरोपों की सजा सभी सफल उम्मीदवारों को नहीं दी जा सकती।
वहीं, राज्य सरकार ने परीक्षा में बड़े स्तर पर गड़बड़ी और प्रश्नपत्र लीक होने के साक्ष्य मिलने का हवाला देते हुए परीक्षा रद्द करने के फैसले का बचाव किया था। हालांकि, अदालत ने सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया।
भर्ती परीक्षाओं की जांच के बीच आया फैसला
गौरतलब है कि झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर पहले भी कई सवाल उठ चुके हैं। राज्य सरकार ने वर्ष 2014 से आयोजित JPSC, JSSC और आउटसोर्स एजेंसी TDPL से संबंधित 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द किया था। इसके अलावा 23 अन्य परीक्षाओं की जांच के निर्देश भी दिए गए थे।
फिलहाल हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद JSSC CGL-2023 के सफल अभ्यर्थियों को राहत मिली है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार और कर्मचारी चयन आयोग नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया को लेकर क्या कदम उठाते हैं।
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