Last updated: November 5th, 2026 at 12:39 pm

अग्निवीर योजना को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। केंद्र सरकार की ओर से अग्निवीरों की सेवा अवधि दो साल बढ़ाने के फैसले पर समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने नाराजगी जताई है। उन्होंने इस फैसले को युवाओं के लिए बेकार बताते हुए कहा कि इससे सेना में स्थायी नौकरी की समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका कहना है कि युवाओं को कुछ साल की सेवा के बजाय सेना में पहले की तरह स्थायी भर्ती का अवसर मिलना चाहिए।
अवधेश प्रसाद ने दावा किया कि 2027 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी और इसके बाद केंद्र में भी सपा सत्ता में आएगी। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के 24 घंटे के भीतर अग्निवीर जैसी व्यवस्था समाप्त कर दी जाएगी। साथ ही सेना में पुरानी भर्ती प्रणाली फिर से लागू की जाएगी।
सपा सांसद ने सवाल उठाया कि छह साल तक सेना में सेवा देने के बाद युवाओं के सामने रोजगार का क्या विकल्प होगा? उनके मुताबिक, सेना में भर्ती होने वाले युवाओं को लंबे समय तक देश की सेवा करने और स्थायी रोजगार पाने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास का हवाला देते हुए पुरानी भर्ती व्यवस्था बहाल करने की मांग की।
*केंद्र सरकार ने अग्निवीरों के लिए क्या बदला?*
दरअसल, 4 नवंबर 2026 को केंद्रीय कैबिनेट ने अग्निवीर योजना के तहत सेवा अवधि को लेकर बड़ा फैसला लिया। इसके मुताबिक, शुरुआती चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों में से योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर 25 प्रतिशत को नियमित सेवा में शामिल करने का प्रावधान पहले की तरह रहेगा। वहीं, बाकी 75 प्रतिशत अग्निवीरों को उनकी इच्छा के आधार पर दो साल की अतिरिक्त सेवा का अवसर दिया जाएगा।
दो साल की अतिरिक्त सेवा पूरी होने के बाद इच्छुक अग्निवीरों को निर्धारित चयन मानदंडों के आधार पर नियमित सैनिक के रूप में शामिल होने का अवसर मिलेगा। इस अतिरिक्त अवधि में उन्हें पहले की तुलना में अधिक वेतन, बेहतर सेवा निधि और वरिष्ठता से जुड़े लाभ भी दिए जाएंगे। यानी अब अग्निवीरों के लिए चार साल के बाद सेना से बाहर होने के बजाय छह साल तक सेवा जारी रखने का रास्ता तैयार किया गया है। हालांकि, नियमित सेवा में शामिल होना चयन प्रक्रिया और पात्रता पर निर्भर करेगा।
*अग्निवीरों को मिलती है कितनी सैलरी और सुविधाएं?*
अग्निपथ योजना के तहत पहले साल अग्निवीरों को 30 हजार रुपये मासिक पैकेज मिलता है, जो चौथे साल तक बढ़कर 40 हजार रुपये हो जाता है। इसमें से 70 प्रतिशत राशि उन्हें वेतन के रूप में मिलती है, जबकि 30 प्रतिशत अग्निवीर कॉर्पस फंड में जमा होता है। सरकार भी इसमें बराबर का योगदान करती है।
चार साल की सेवा पूरी होने पर ब्याज सहित लगभग 11.71 लाख रुपये की सेवा निधि दी जाती है, जो आयकर से मुक्त होती है। इसके अलावा 48 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर, पात्रता के अनुसार जोखिम एवं कठिनाई भत्ते और सैन्य प्रशिक्षण के साथ कौशल प्रमाणपत्र की सुविधा भी मिलती है। मूल योजना में चार साल की सेवा पूरी होने पर पेंशन और ग्रेच्युटी का प्रावधान नहीं था।
फिलहाल केंद्र सरकार के नए फैसले और अग्निवीर योजना को लेकर विपक्ष की आपत्तियों के बीच यह मुद्दा फिर राजनीतिक चर्चा में आ गया है। अब देखना होगा कि सरकार के इस बदलाव से अग्निवीरों को कितना लाभ मिलता है और स्थायी भर्ती की मांग को लेकर विपक्ष का विरोध आगे किस रूप में सामने आता है।
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