Last updated: July 29th, 2026 at 12:52 pm

लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान किसी भी प्रदर्शनकारी पर गोली नहीं चलाई गई और इस संबंध में लगाए जा रहे आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।
सदन में बोलते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने केवल आंसू गैस के गोले छोड़े थे, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने दोहराया कि गोली चलाने जैसी कोई कार्रवाई नहीं हुई और इस तरह के दावे भ्रामक हैं।
गोली चलाने का आदेश कौन देता है?
केंद्रीय मंत्री ने सदन में यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय कानून के अनुसार यदि किसी विशेष परिस्थिति में फायरिंग जैसी कार्रवाई की आवश्यकता पड़ती है, तो उसका आदेश किसी मंत्री द्वारा नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि ऐसा आदेश देने का अधिकार केवल मजिस्ट्रेट के पास होता है। इसलिए किसी केंद्रीय मंत्री पर गोली चलाने का आदेश देने का आरोप लगाना कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
सरकार ने छात्रों के मुद्दे पर रखा पक्ष
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार छात्रों की समस्याओं और उनकी चिंताओं को गंभीरता से लेती है। हालांकि, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और सुरक्षा एजेंसियां परिस्थितियों के अनुसार कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करती हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य छात्रों के हितों की रक्षा करना है, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि किसी भी विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनी रहे।
संसद में बहस के बीच आया बयान
केंद्रीय मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया जब संसद में छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और पेपर लीक से जुड़े मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस चल रही है। सरकार ने एक बार फिर दोहराया कि प्रदर्शन के दौरान सभी कदम कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए उठाए गए।
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