Last updated: July 2nd, 2026 at 09:35 am

लद्दाख से जुड़े लंबे समय से लंबित राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दों पर आज गृह मंत्रालय और क्षेत्रीय संगठनों के बीच अहम बैठक होने जा रही है। लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के प्रतिनिधि गृह मंत्रालय की अनौपचारिक उप-समिति के साथ विभिन्न मांगों पर चर्चा करेंगे।
यह बैठक 23 जून को लद्दाख बंद के बाद आयोजित की जा रही है। बंद का आयोजन 22 मई को नई दिल्ली में हुई बैठक के दौरान हुए कथित समझौतों को लागू नहीं किए जाने के विरोध में किया गया था। पहली बार गृह मंत्रालय की टीम सीधे लेह पहुंचकर स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करेगी।
बैठक में क्षेत्रीय संगठनों की ओर से संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत विशेष संवैधानिक सुरक्षा, लद्दाख के लिए अधिक प्रशासनिक, विधायी और वित्तीय अधिकारों वाली निर्वाचित व्यवस्था तथा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में कार्यकारी ढांचे की मांग प्रमुखता से उठाई जाएगी।
एलएबी ने इस संबंध में एक मसौदा प्रस्ताव भी तैयार किया है, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर अधिक अधिकारों वाली लोकतांत्रिक संस्था बनाने का सुझाव दिया गया है। इस मसौदे पर पहले केडीए के साथ चर्चा होगी और बाद में संयुक्त प्रस्ताव के रूप में गृह मंत्रालय को सौंपा जाएगा।
बैठक में 22 मई को हुई वार्ता के दौरान बने सैद्धांतिक सहमति बिंदुओं को लागू करने और उस बैठक की आधिकारिक कार्यवृत्ति (MoM) सार्वजनिक करने की मांग भी की जाएगी। लद्दाख के सांसद हाजी हनीफा जान भी इस प्रक्रिया से जुड़े रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार का मानना है कि फिलहाल सीमित राजस्व संसाधनों के कारण लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देना व्यावहारिक नहीं है। हालांकि भविष्य में आर्थिक और प्रशासनिक क्षमता बढ़ने के बाद इस विषय पर आगे विचार किया जा सकता है।
गौरतलब है कि वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन के बाद से LAB और KDA लगातार छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक संरक्षण, पूर्ण राज्य का दर्जा, लेह और कारगिल के लिए अलग लोकसभा सीटें तथा अलग लोक सेवा आयोग की स्थापना जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। आज की बैठक को इन मुद्दों पर आगे की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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