Last updated: September 26th, 2026 at 10:38 am

जमुई की नाबालिग पीड़िता की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा किए जाने को लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई है। आरजेडी सांसद मीसा भारती ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ FIR दर्ज कराने के लिए पटना के सचिवालय थाने का रुख किया।
मीसा भारती का आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर मुख्यमंत्री के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया। हालांकि, पुलिस के मुताबिक मीसा भारती की ओर से दिया गया आवेदन पहले से दर्ज मामले की जांच का हिस्सा बना दिया गया।
जमुई की नाबालिग पीड़िता की तस्वीर से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, जमुई में एक नाबालिग छात्रा के साथ कथित छेड़खानी की घटना के बाद मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया और गिरफ्तारियां भी कीं। इसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की थी।
मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से पीड़िता और उसके परिवार के साथ तस्वीर साझा की गई। तस्वीर कुछ ही देर बाद हटा दी गई। इस पोस्ट को लेकर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि इससे नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर होने का खतरा पैदा हुआ और यह POCSO के प्रावधानों का उल्लंघन है।
CM के खिलाफ केस की मांग लेकर थाने पहुंचीं मीसा भारती
विवाद बढ़ने के बाद मीसा भारती सचिवालय थाना पहुंचीं और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ POCSO Act की धारा 23 और Juvenile Justice Act की धारा 74 के तहत कार्रवाई की मांग की। मीसा भारती ने आरोप लगाया कि वह काफी देर तक थाने में आवेदन लेकर बैठी रहीं, लेकिन पुलिस ने मुख्यमंत्री के खिलाफ FIR दर्ज नहीं की।
मीसा भारती ने कहा कि वह एक सांसद होने के बावजूद थाने में अपनी शिकायत दर्ज नहीं करा पा रही हैं तो आम लोगों की स्थिति क्या होगी। उन्होंने बिहार में हाल के दिनों में बच्चियों के साथ सामने आई घटनाओं का भी जिक्र किया और कानून के समान रूप से लागू होने का सवाल उठाया।
पुलिस ने क्या कहा?
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह है कि सचिवालय थाने में मुख्यमंत्री के खिलाफ मीसा भारती की शिकायत पर FIR दर्ज नहीं हुई, लेकिन इसी विवाद से जुड़े मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय के एक कर्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
पुलिस के मुताबिक मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार की तस्वीर साझा किए जाने के मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय के एक स्टेनोग्राफर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि तस्वीर के प्रसार से नाबालिग की निजता और पहचान प्रभावित हो सकती थी। मामले में BNS, POCSO Act और Information Technology Act की धाराएं लगाई गई हैं।
पुलिस का कहना है कि मीसा भारती की ओर से दिया गया आवेदन भी पहले से दर्ज मामले की जांच में शामिल कर लिया गया है। ऐसे में अब यह विवाद केवल जमुई की घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीर साझा किए जाने और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सियासी बहस तेज हो गई है।
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