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NCP में अध्यक्ष पद को लेकर नया विवाद, सुनेत्रा पवार की नियुक्ति पर लीगल नोटिस, दोबारा चुनाव की उठी मांग

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर एक बार फिर संगठनात्मक विवाद सामने आया है। पार्टी के
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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर एक बार फिर संगठनात्मक विवाद सामने आया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार की नियुक्ति को चुनौती देते हुए लीगल नोटिस भेजा है। नोटिस में 26 फरवरी 2026 को हुए अध्यक्ष पद के चुनाव को पार्टी संविधान के विपरीत बताते हुए उसे निरस्त करने और नए सिरे से निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग की गई है।

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    चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल

    9 जुलाई को जारी इस लीगल नोटिस की प्रतियां सुनेत्रा पवार, कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और पार्टी सचिव बृजमोहन श्रीवास्तव को भेजी गई हैं। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया पार्टी संविधान और निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं अपनाई गई। इसलिए संशोधित पदाधिकारियों की सूची को भी तब तक प्रभावी न माना जाए, जब तक स्वतंत्र चुनाव अधिकारी की देखरेख में दोबारा चुनाव नहीं कराया जाता।

    कार्यकारिणी बैठक की वैधता पर भी सवाल

    सच्चिदानंद सिंह का दावा है कि 26 फरवरी 2026 को आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में उन्हें शामिल नहीं किया गया। उनका कहना है कि तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित पवार के निधन के बाद संशोधित संविधान के अनुसार नए अध्यक्ष के चुनाव तक कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल को संगठन से जुड़े सभी अधिकार प्राप्त थे।

    उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाने का अधिकार केवल प्रफुल्ल पटेल के पास था, लेकिन बैठक राष्ट्रीय महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव ने बुलाई, जो पार्टी संविधान के अनुरूप नहीं था।

    चुनाव आयोग को भेजे गए पत्र पर भी आपत्ति

    नोटिस में यह भी कहा गया है कि बैठक बुलाने के लिए चुनाव आयोग को भेजे गए पत्र में आवश्यक कार्यकारिणी सदस्यों की सहमति नहीं ली गई थी। इसी आधार पर चुनाव प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाते हुए पूरे चुनाव को रद्द कर स्वतंत्र और पारदर्शी तरीके से नए चुनाव कराने की मांग की गई है।

    इस घटनाक्रम के बाद एनसीपी की आंतरिक राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। अब पार्टी नेतृत्व इस लीगल नोटिस पर क्या रुख अपनाता है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।

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