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फरक्का संधि पर निशांत कुमार का बड़ा बयान, बोले- बिहार के हित से समझौता नहीं

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा संधि यानी फरक्का
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बिहार के स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा संधि यानी फरक्का संधि के नवीनीकरण का विरोध किया है। बुधवार को ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम में शामिल होने से पहले निशांत ने कहा कि बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए इस संधि का किसी भी कीमत पर नवीनीकरण नहीं होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के सामने भी बिहार का पक्ष रखा गया है।

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    ‘बिहार को गंगा के पानी में उचित हिस्सा मिलना चाहिए’

    निशांत कुमार ने कहा कि फरक्का संधि बिहार के हित में नहीं है। उनके मुताबिक बिहार को गंगा के पानी का उचित हिस्सा मिलना चाहिए, ताकि राज्य की पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक जरूरतें पूरी हो सकें।

    उन्होंने कहा, “हम लोगों ने केंद्र सरकार से कह दिया है कि फरक्का संधि का किसी हालत में नवीनीकरण नहीं होना चाहिए।”

    निशांत ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के विकास के लिए जो काम किए हैं, उन्हें लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ बिहार के जल हितों का मुद्दा भी मजबूती से उठाया जा रहा है।

    दिसंबर 2026 में खत्म हो रही है 1996 की संधि

    भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे को लेकर 12 दिसंबर 1996 को 30 साल की संधि हुई थी। यह समझौता दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाला है। इसके तहत फरक्का बैराज पर गंगा के पानी के बंटवारे की व्यवस्था तय की गई थी।

    संधि के नवीनीकरण को लेकर इस साल बातचीत और राज्यों की चिंताएं चर्चा में हैं। फरवरी 2026 में केंद्र सरकार ने संसद में बताया था कि संधि के नवीनीकरण को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हुई थी। साथ ही बिहार समेत संबंधित राज्यों की जरूरतों पर अंतर-मंत्रालयी स्तर पर विचार किया गया है।

    बिहार लंबे समय से उठा रहा है फरक्का का मुद्दा

    फरक्का बैराज और गंगा जल बंटवारे को लेकर बिहार में लंबे समय से चिंताएं जताई जाती रही हैं। राज्य सरकार और जेडीयू नेताओं का तर्क रहा है कि गाद जमने, नदी के प्रवाह में बदलाव और बाढ़ जैसी समस्याओं के बीच बिहार के जल हितों को संधि के भविष्य पर होने वाली चर्चा में प्रमुखता मिलनी चाहिए।

    सितंबर में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा को लिखे पत्र में कहा था कि गंगा जल संधि पर फैसला बिहार की पेयजल और औद्योगिक जल जरूरतों समेत संबंधित पहलुओं को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

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