Last updated: August 15th, 2026 at 08:15 pm

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सिंधु जल संधि को लेकर अपना रुख एक बार फिर स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को अपनी नदियों और जल संसाधनों का इस्तेमाल अपने हितों के अनुसार करने का अवसर मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने संधि के निलंबन की स्थिति को जारी रखने की वकालत की।
जल संसाधनों पर J&K के अधिकार की बात
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर लंबे समय से अपनी नदियों का इस्तेमाल पीने के पानी, जलविद्युत और अन्य जरूरतों के लिए पूरी क्षमता से नहीं कर पाया है। उनका कहना है कि क्षेत्र के लोगों के लिए ये नदियां बेहद महत्वपूर्ण हैं और स्थानीय हितों को ध्यान में रखते हुए इनके इस्तेमाल पर विचार होना चाहिए।
उन्होंने सिंधु जल संधि के निलंबन का उल्लेख करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के हित में इस स्थिति को बनाए रखा जाना चाहिए, ताकि क्षेत्र अपने जल संसाधनों के उपयोग को लेकर अधिक स्वतंत्र निर्णय ले सके।
हिंसा को लेकर भी जताई चिंता
मुख्यमंत्री ने हालिया हमले की भी निंदा की, जिसमें कुछ लोग घायल हुए थे। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को उच्च स्तर की सुरक्षा उपलब्ध है, तो उसके बावजूद इस तरह की घटना होना गंभीर चिंता का विषय है।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। उनके मुताबिक, किसी मुद्दे या व्यक्ति से असहमति होने पर अपनी बात रखने का लोकतांत्रिक तरीका चुनाव और शांतिपूर्ण विरोध है।
राजनीतिक मांगों को लेकर बोले- आंदोलन अभी खत्म नहीं
जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक मुद्दों और भविष्य के कार्यक्रमों को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न विकल्पों पर चर्चा जारी है। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को उन्होंने अंतिम चरण नहीं माना और संकेत दिया कि आगे भी राजनीतिक गतिविधियां जारी रह सकती हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से जम्मू-कश्मीर का राजनीतिक दर्जा बहाल करने को लेकर किए गए वादे का जिक्र करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा जाता रहेगा। उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि वह इस विषय को उठाते रहेंगे और आगे की रणनीति परिस्थितियों के अनुसार तय की जाएगी।
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