Last updated: July 20th, 2026 at 12:09 pm

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान राजधानी में तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनकारियों को संसद भवन की ओर बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। इस दौरान कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए और कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सरकार को चर्चा करनी चाहिए। उनका आरोप था कि छात्रों की मांगों पर संवाद करने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया जा रहा है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को आलोचना करने के बजाय शिक्षा व्यवस्था और छात्रों की समस्याओं का समाधान करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने NEET परीक्षा और अन्य मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग दोहराई।
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवादों पर चर्चा कराने तथा शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी प्रदर्शनकारियों के साथ हुई कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों को सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग करना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है और सरकार को इस मामले में संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए।
वहीं, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी सरकार से छात्रों के साथ संवाद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं की समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए होना चाहिए और लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक सख्त कर दी गई है। संसद भवन और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है तथा प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।
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