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जमीन मालिकों को बड़ी राहत, पटना हाईकोर्ट ने जमाबंदी रद्द करने की प्रक्रिया पर लगाई सख्त रोक

पटना हाईकोर्ट ने बिहार में जमीन से जुड़े मामलों पर एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि राजस्व
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पटना हाईकोर्ट ने बिहार में जमीन से जुड़े मामलों पर एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि राजस्व अधिकारी किसी भी पुरानी जमाबंदी को मनमाने ढंग से रद्द नहीं कर सकते। अदालत ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई ऐसी कार्रवाई न्यायसंगत नहीं मानी जाएगी।

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    न्यायालय ने एक पुराने भूमि विवाद की सुनवाई के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को अपने अधिकार क्षेत्र की सीमाओं का पालन करना चाहिए और वे न्यायिक संस्थाओं की भूमिका नहीं निभा सकते।

    मामला जमुई जिले की एक जमीन से संबंधित था, जहां कई दशकों से नियमित रूप से लगान जमा किया जा रहा था। याचिकाकर्ता का आरोप था कि अचानक राजस्व विभाग ने लगान रसीद जारी करना बंद कर दिया और बाद में जमाबंदी रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि जब मामला पहले से न्यायालय के विचाराधीन था, तब भी संबंधित अधिकारियों ने प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी। इस पर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि किसी लंबित न्यायिक मामले में कार्यपालिका का हस्तक्षेप उचित नहीं माना जा सकता।

    हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि सरकार या कोई विभाग किसी पुरानी जमाबंदी को चुनौती देना चाहता है, तो उसे निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए सक्षम सिविल न्यायालय का रुख करना होगा। केवल प्रशासनिक आदेश के आधार पर किसी व्यक्ति के भूमि अधिकारों को समाप्त नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को नियमानुसार लगान रसीद जारी की जाए और विवादित कार्रवाई को आगे न बढ़ाया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि भविष्य में ऐसे मामलों में कानून के प्रावधानों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला बिहार के उन लाखों भूमि स्वामियों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, जिनकी पुरानी जमाबंदियों को लेकर समय-समय पर विवाद उत्पन्न होते रहे हैं। न्यायालय के इस निर्णय से भूमि अधिकारों की सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि न्यायिक आदेशों की अवहेलना की गई या मनमानी कार्रवाई जारी रही, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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