Last updated: April 27th, 2026 at 06:25 am

नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण से पहले राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। उत्तर 24 परगना जिले के ठाकुरनगर में आयोजित एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने मतुआ और नामशूद्र समुदाय को नागरिकता देने का भरोसा दिलाया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत शरणार्थी परिवारों को हर हाल में नागरिकता देगी। उन्होंने इसे “मोदी की गारंटी” बताते हुए कहा कि इन समुदायों को देश के अन्य नागरिकों के समान सभी अधिकार और सुविधाएं मिलेंगी।
मतुआ समुदाय को साधने की कोशिश में पीएम मोदी ने कहा कि देश का ऐतिहासिक दायित्व है कि वह शरणार्थियों की देखभाल करे। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी उनकी विचारधारा पर चलती है और शरणार्थियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभा रही है।
गौरतलब है कि मतुआ समुदाय की पश्चिम बंगाल में बड़ी आबादी है और राज्य की कई विधानसभा सीटों पर उनका प्रभाव निर्णायक माना जाता है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले पीएम का यह दौरा और नागरिकता का वादा राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने इस दौरान ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है और महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि जनता अब बदलाव चाहती है और भारतीय जनता पार्टी को वोट देकर “टीएमसी के शासन से मुक्ति” दिलाने का आह्वान किया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने वोट के जरिए राज्य में नई सरकार बनाने में सहयोग करें।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने ठाकुरनगर स्थित मतुआ संप्रदाय के प्रमुख मंदिर में पूजा-अर्चना भी की और बाद में कोलकाता में एक रोड शो कर पार्टी उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटाया।
चुनाव से ठीक पहले दिए गए इन बयानों को राजनीतिक विश्लेषक मतुआ समुदाय और अन्य मतदाताओं को प्रभावित करने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं, जिससे राज्य की चुनावी तस्वीर पर असर पड़ सकता है।
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