Last updated: August 14th, 2026 at 04:20 pm

80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को संबोधित करते हुए भारत की विकास यात्रा, लोकतांत्रिक मूल्यों, स्वतंत्रता संग्राम की विरासत और भविष्य की आकांक्षाओं का उल्लेख किया। उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बीते एक दशक से कुछ अधिक समय में भारत ने तेज गति से समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास किया है।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि स्वतंत्रता केवल बंधनों से मुक्ति का नाम नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक अर्थ प्रत्येक नागरिक को अपनी आकांक्षाएं पूरी करने के अवसर उपलब्ध कराना भी है। उन्होंने कहा कि देशवासियों की मेहनत और भागीदारी से भारत को विकास के नए लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।
स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को किया याद
राष्ट्रपति ने 15 अगस्त 1947 को मिली आजादी को याद करते हुए स्वतंत्र भारत के निर्माण में योगदान देने वाले नागरिकों की सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, श्रमिकों और किसानों सहित विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले लोगों को राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण भागीदार बताया।
उन्होंने महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक सुधार से जुड़े महान व्यक्तित्वों को भी श्रद्धांजलि दी। राष्ट्रपति ने कहा कि देश अपनी समृद्ध विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों को साथ लेकर आधुनिक विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।
विभाजन की त्रासदी का भी किया उल्लेख
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने 14 अगस्त को मनाए जाने वाले विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश के विभाजन के दौरान सांप्रदायिक हिंसा के कारण लाखों लोगों को विस्थापन और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने स्वतंत्रता के बाद 550 से अधिक रियासतों के भारत में एकीकरण को भी बड़ी ऐतिहासिक चुनौती बताया और सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद किया।
समावेशी विकास पर राष्ट्रपति का जोर
राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय में देश ने तेज गति से समावेशी विकास की दिशा में प्रगति की है। उनके अनुसार, विरासत और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने के साथ-साथ विकास में बाधा बनने वाले कई पुराने अवरोधों को दूर करने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने जनप्रतिनिधियों, कार्यपालिका और न्यायपालिका की जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक संस्था का उद्देश्य जनहित और राष्ट्रहित की पूर्ति होना चाहिए।
ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के योगदान का उल्लेख
राष्ट्रपति ने महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर उनके और सावित्रीबाई फुले के योगदान को याद किया। उन्होंने सामाजिक न्याय, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण और समानता के क्षेत्र में उनके कार्यों को महत्वपूर्ण बताया।
राष्ट्रपति के अनुसार, वंचित वर्गों को मुख्यधारा में आगे लाने को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने बताया कि 25 करोड़ से अधिक लोगों के गरीबी से बाहर आने और प्रधानमंत्री जन धन योजना के माध्यम से करीब 59 करोड़ खाताधारकों के बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने का उल्लेख किया। इनमें 32 करोड़ से अधिक महिला खाताधारक शामिल हैं।
खाद्य सुरक्षा और डिजिटल बदलाव का भी जिक्र
राष्ट्रपति ने देश में करीब 80 करोड़ लोगों के लिए निशुल्क राशन की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए खाद्य सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे की चर्चा करते हुए कहा कि डिजिटल भुगतान अब गांवों की छोटी दुकानों और रेहड़ी-पटरी तक पहुंच चुका है।
उन्होंने रियल टाइम डिजिटल लेनदेन में भारत की बड़ी हिस्सेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक के माध्यम से सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को अधिक पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचाने में मदद मिली है।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में देश की विकास यात्रा को स्वतंत्रता संग्राम की विरासत, लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और तकनीकी प्रगति के साथ जोड़ते हुए नागरिकों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर उनका यह संबोधन भारत की उपलब्धियों के साथ-साथ भविष्य के लक्ष्यों और जिम्मेदारियों पर भी केंद्रित रहा।
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