Last updated: September 5th, 2026 at 12:22 pm

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित करीब 115 साल पुरानी बताई जा रही मस्जिद को प्रशासन ने शनिवार तड़के हटा दिया। प्रशासन के अनुसार, मस्जिद सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण के रूप में मौजूद थी और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अदालत के आदेश के बाद की गई। कार्रवाई के बाद कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बसपा, आम आदमी पार्टी और एआईएमआईएम के नेताओं ने इसे लेकर अलग-अलग सवाल उठाए हैं।
इकरा हसन ने कार्रवाई के तरीके पर उठाए सवाल
कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि मस्जिद गिराए जाने से पहले संबंधित लोगों को हाईकोर्ट का रुख करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उनके मुताबिक, निचली अदालत के आदेश के बाद परिसर को सील कर बैरिकेडिंग की गई थी।
इकरा हसन का दावा है कि स्थानीय लोग अधिकारियों से मिलकर कुछ समय मांगना चाहते थे, लेकिन उन्हें ऐसा अवसर नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले के कुछ प्रमुख लोगों को उनके घरों में ही रोक दिया गया और इसके बाद सुबह मस्जिद को गिरा दिया गया।
इमरान प्रतापगढ़ी ने सरकार से पूछा सवाल
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने सोशल मीडिया के जरिए मस्जिद को हटाए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने करीब एक सदी पुरानी मस्जिद को अवैध बताए जाने को लेकर सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने इस कार्रवाई को व्यापक राजनीतिक संदर्भ से जोड़ते हुए सरकार की नीतियों पर भी सवाल खड़े किए।
संजय सिंह ने जमीन के दस्तावेजों का मुद्दा उठाया
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने मस्जिद की जमीन के रिकॉर्ड को लेकर सवाल किया। उन्होंने दावा किया कि संबंधित खसरा नंबर की जमीन पुराने दस्तावेजों में याकूब खान और वहीद खान के नाम दर्ज है तथा इसी क्षेत्र में मंदिर, मस्जिद और कलेक्ट्रेट मौजूद हैं।
संजय सिंह ने मस्जिद के पुराने होने और वक्फ बोर्ड में दर्ज होने का भी दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में वक्फ बोर्ड को पक्ष बनाए बिना कार्रवाई की गई।
मायावती ने जल्दबाजी से बचने की अपील की
बसपा प्रमुख मायावती ने भी सहारनपुर की घटना पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने धार्मिक स्थलों को अवैध बताकर जल्दबाजी में गिराने की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सरकार से ऐसे मामलों में वैकल्पिक कानूनी रास्ते तलाशने की अपील की।
मायावती ने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था में सभी धर्मों के लोगों और उनके धार्मिक स्थलों के प्रति समान सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की।
ओवैसी ने धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी मस्जिद गिराए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने धार्मिक स्थलों पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सवाल उठाते हुए धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार का मुद्दा उठाया।
ओवैसी के मुताबिक, मस्जिद कमेटी ने अदालत के सामने 1911 से जुड़े दस्तावेज पेश किए थे। उन्होंने मस्जिद की जमीन पर सरकारी दावे को लेकर लिमिटेशन एक्ट और एडवर्स पजेशन जैसे कानूनी पहलुओं का भी उल्लेख किया।
अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने की कार्रवाई
प्रशासन के मुताबिक, 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने मस्जिद कमेटी की अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के पहले के आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद शनिवार सुबह करीब 5 बजे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
मस्जिद को लेकर शिकायत पिछले साल बजरंग दल के पूर्व प्रांतीय संयोजक विकास त्यागी की ओर से की गई थी। शिकायत में कलेक्ट्रेट जैसे सरकारी परिसर में मस्जिद के निर्माण को अवैध बताते हुए सरकारी जमीन के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया था।
सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह की अदालत ने सुनवाई के बाद मस्जिद हटाने का आदेश दिया था। मामले में कथित अतिक्रमण और सरकारी जमीन के इस्तेमाल को लेकर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति या जुर्माने का आदेश भी दिया गया था।
कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। फिलहाल मस्जिद को लेकर प्रशासन और विपक्षी नेताओं के दावों के बीच मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा में है।
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