Last updated: July 16th, 2026 at 11:20 am

प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को लेकर विपक्ष के भीतर चर्चा लगातार तेज होती जा रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की ओर से आए बयान के बाद अब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने भी संकेत दिए हैं कि यदि सरकार विपक्ष के सुझावों को विधेयक में शामिल करती है, तो इस मुद्दे पर दोबारा विचार किया जा सकता है।
नागपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान संजय राउत ने कहा कि फिलहाल विपक्ष का रुख प्रस्तावित परिसीमन विधेयक का विरोध करने का है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकार विपक्ष द्वारा सुझाए गए आवश्यक संशोधनों को स्वीकार करती है, तो सभी दल बैठकर इस पर सामूहिक रूप से निर्णय लेंगे।
राउत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले एनसीपी (शरद पवार गुट) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा था कि यदि लोकसभा की सभी सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत की वृद्धि के आधार पर परिसीमन किया जाता है, तो उसका विरोध करने का कोई विशेष कारण नहीं होगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि अंतिम फैसला विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के भीतर चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।
केंद्र सरकार आगामी 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पेश करने की तैयारी में है। प्रस्तावित विधेयक में लोकसभा की कुल सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और नए परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने का प्रावधान बताया जा रहा है।
संजय राउत ने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह विधेयक मानसून सत्र में पेश होगा या नहीं। उन्होंने कहा कि जब विधेयक संसद में आएगा, तब विपक्षी दल विस्तृत चर्चा करेंगे और उसके बाद सामूहिक निर्णय लिया जाएगा।
इसके अलावा राउत ने विपक्षी दलों में टूट की अटकलों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक चर्चाओं का कोई ठोस आधार नहीं है और विपक्ष अपने मुद्दों पर एकजुट होकर आगे बढ़ेगा।
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