Last updated: September 26th, 2026 at 10:45 am

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब NDA के सहयोगी दलों की ओर से भी चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की मांग उठने लगी है। केंद्रीय मंत्री और LJP (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान के बाद राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने भी चुनाव आयोग से स्थिति साफ करने को कहा है।
उपेंद्र कुशवाहा ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि SIR से जुड़े विवाद के कारण आम लोगों में काफी उलझन पैदा हो गई है। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले को संबोधित करते हुए तत्काल स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
चिराग पासवान भी कर चुके हैं स्पष्टीकरण की मांग
इससे पहले चिराग पासवान ने भी कहा था कि चुनाव आयोग को लोगों के मन में पैदा हुई शंकाओं को दूर करना चाहिए। उनका कहना था कि सरकार का हिस्सा होने के नाते वह किसी संवैधानिक संस्था का बचाव करने की भूमिका में नहीं हैं, लेकिन अगर चुनाव प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं तो चुनाव आयोग को अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।
NDA के एक अन्य सहयोगी दल TDP ने भी चुनाव आयोग से पारदर्शिता और स्पष्टीकरण की जरूरत बताई है। इस तरह SIR को लेकर आयोग से जवाब मांगने वाले NDA सहयोगियों में LJP (रामविलास), RLM और TDP के नेता शामिल हो गए हैं।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद
SIR को लेकर बहस उस रिपोर्ट के बाद और तेज हुई, जिसमें चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के विभिन्न फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज किए जाने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों का संबंध नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने, Form-6 में बदलाव और मतदाता डेटा से जुड़े मामलों से था।
इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग के अधिकारियों ने इन खबरों में बताए गए मतभेदों को अलग तरीके से प्रस्तुत किया है। आयोग की ओर से कहा गया है कि SIR समेत सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए और निर्णय सर्वसम्मति से हुए।
SIR पर क्यों हो रही है इतनी चर्चा?
बिहार में जून 2025 से SIR की प्रक्रिया शुरू हुई थी और बाद में इसे दूसरे राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों तक भी बढ़ाया गया। मतदाता सूची में नामों की जांच और संशोधन की इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना है।
अब NDA के कुछ सहयोगी दलों की ओर से भी आयोग से स्पष्टीकरण की मांग किए जाने के बाद SIR विवाद को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
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