
शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (SKUAST-K) वाडूरा से जुड़े बेरोजगार एग्रीकल्चर ग्रेजुएट्स ने जम्मू-कश्मीर में सरकारी भर्ती के सीमित अवसरों को लेकर मंगलवार को लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने SRO-442 की समीक्षा या उसे रद्द करने, नियमित भर्तियां शुरू करने और एग्रीकल्चर प्रोफेशनल्स के लिए रोजगार का स्पष्ट रोडमैप तैयार करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने “हकदार को रोजगार दो” और “हमें न्याय चाहिए” जैसे नारे लगाए। कई प्रदर्शनकारियों के हाथों में अपनी मांगों से जुड़े पोस्टर थे। कुछ छात्रों ने रोजगार के अधिकार को लेकर अपने हाथों पर “Roots Need Rights” जैसे संदेश भी लिखे।
सीधी भर्ती के अवसर बहाल करने की मांग
प्रदर्शन कर रहे ग्रेजुएट्स का कहना है कि प्रोफेशनल डिग्री पूरी करने के बाद भी एग्रीकल्चर सेक्टर में सरकारी नौकरी के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं हैं। छात्रों ने भर्ती व्यवस्था में बदलाव कर योग्य एग्रीकल्चर ग्रेजुएट्स के लिए सीधी भर्ती के रास्ते बढ़ाने की मांग की है।
एग्रीकल्चर ग्रेजुएट कोमल ने कहा कि छात्रों ने कई साल अपनी प्रोफेशनल पढ़ाई में लगाए हैं और उम्मीद की थी कि डिग्री के बाद संबंधित सरकारी विभागों में रोजगार के अवसर मिलेंगे। उनके मुताबिक, सीमित भर्तियों के कारण कई ग्रेजुएट्स को पढ़ाई पूरी करने के बाद अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।
कोमल ने नियमित भर्ती अभियान चलाने, खाली पदों की पहचान कर उन्हें भरने और पारदर्शी चयन प्रक्रिया लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, प्रदर्शन जारी रहेगा।
‘सिर्फ आश्वासन नहीं, तय भर्ती कैलेंडर चाहिए’
एग्रीकल्चर ग्रेजुएट ज़ैनब नज़ीर ने कहा कि कई योग्य छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के बावजूद संबंधित क्षेत्र में नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भर्ती नियमों में बदलाव करते समय एग्रीकल्चर ग्रेजुएट्स की चिंताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
ज़ैनब ने समय पर भर्ती नोटिफिकेशन जारी करने, पारदर्शी चयन प्रक्रिया और एक तय भर्ती कैलेंडर की मांग की। उनके मुताबिक, इससे युवाओं को अपने करियर की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने प्रशासन से छात्र प्रतिनिधियों के साथ सीधे बातचीत करने और रोजगार से जुड़े मुद्दे का स्थायी समाधान निकालने की अपील की।
छात्रों ने भर्ती नीति की समीक्षा की मांग उठाई
एग्रीकल्चर छात्र साहिल नज़ीर ने कहा कि प्रदर्शन का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में एग्रीकल्चर ग्रेजुएट्स के रोजगार से जुड़े मुद्दों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है। उनके मुताबिक, छात्रों को अपनी योग्यता के अनुरूप सरकारी पदों पर आवेदन और चयन का निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए।
साहिल ने नए ग्रेजुएट्स के लिए सीधी भर्ती के अवसरों के साथ-साथ मौजूदा कर्मचारियों के प्रमोशन की व्यवस्था में भी संतुलन बनाए रखने की बात कही। उन्होंने नियमित भर्ती कैलेंडर और खाली पदों को समय पर भरने की मांग की।
SRO-442 को लेकर क्या है विवाद?
कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के नेशनल कन्वेनर नासिर खुएहामी ने भी भर्ती व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने जूनियर एग्रीकल्चर एक्सटेंशन ऑफिसर (JAEO) और एग्रीकल्चर एक्सटेंशन ऑफिसर (AEO) के पदों पर सीधी भर्ती के सीमित अवसरों का मुद्दा उठाया।
खुएहामी के मुताबिक, 23 अक्टूबर 2017 के SRO-442 के बाद JAEO पदों की भर्ती व्यवस्था में बदलाव हुआ और सीधी भर्ती के बजाय प्रमोशन पर अधिक जोर दिया गया। एसोसिएशन का दावा है कि इससे एग्रीकल्चर ग्रेजुएट्स के लिए एंट्री-लेवल सरकारी नौकरी का एक महत्वपूर्ण रास्ता सीमित हुआ।
उन्होंने AEO पदों की भर्ती व्यवस्था का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, 1988 के SRO-179 में सीधी भर्ती और प्रमोशन का अनुपात 50:50 था, जबकि बाद में SRO-433 के तहत इसे 20:80 कर दिया गया, यानी प्रमोशन का हिस्सा बढ़ गया।
उमर अब्दुल्ला सरकार से हस्तक्षेप की अपील
प्रदर्शनकारी छात्रों और एसोसिएशन ने जम्मू-कश्मीर सरकार तथा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनकी प्रमुख मांगों में भर्ती ढांचे की समीक्षा, SRO-442 पर पुनर्विचार, JAEO और AEO पदों पर सीधी भर्ती के अवसर बढ़ाना और एग्रीकल्चर ग्रेजुएट्स के रोजगार के लिए स्पष्ट दीर्घकालिक नीति बनाना शामिल है। छात्रों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठा रहे हैं और सरकार से प्रतिनिधियों के साथ बातचीत शुरू करने की उम्मीद कर रहे हैं।
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