Last updated: September 23rd, 2026 at 10:25 am

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल करने की मांग से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बंटा हुआ फैसला सुनाया। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की दो सदस्यीय पीठ ने मामले को पांच जजों की संविधान पीठ के पास भेजने के सवाल पर अलग-अलग राय दी।
जस्टिस दत्ता ने 5 जजों की बेंच को रेफर करने से किया इनकार
जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा कि वह मामले को पांच जजों की बेंच के पास भेजने की मांग को स्वीकार नहीं करते। उन्होंने चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया की तुलना न्यायपालिका की कॉलेजियम व्यवस्था से किए जाने वाली दलीलों पर भी अपनी बात रखी।
जस्टिस दत्ता ने कहा कि यह धारणा सही नहीं है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में केवल जज ही जजों की नियुक्ति करते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में केंद्र और राज्य सरकारों से बातचीत होती है और इंटेलिजेंस रिपोर्ट समेत विभिन्न पहलुओं पर विचार किया जाता है।
उनके मुताबिक, एक-दो नियुक्तियों को लेकर विवाद के आधार पर पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उठी दलील
याचिकाकर्ताओं की ओर से चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में CJI को शामिल करने की मांग की गई है। इस मामले में यह दलील भी दी गई कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया भी निष्पक्ष होनी चाहिए।
जस्टिस दत्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ सरकार की ओर से नामित प्रतिनिधि के चयन समिति में शामिल होने को लेकर उठाई गई दलील में उन्हें कुछ वजन नजर आता है। उन्होंने कहा कि तीन सदस्यीय समिति में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका सीमित रह जाने की आशंका संबंधी तर्क भी उनके सामने रखा गया है।
जस्टिस शर्मा ने कहा- मैं सहमत नहीं हूं
जस्टिस दत्ता के बाद जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने अपना आदेश पढ़ना शुरू किया। उन्होंने जस्टिस दत्ता के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए स्पष्ट कहा कि वह उनके निष्कर्ष से सहमत नहीं हैं।
इस तरह दोनों न्यायाधीशों की राय अलग होने के बाद मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया का सवाल महत्वपूर्ण हो गया है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान 2023 के कानून के तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति व्यवस्था को लेकर उठाई गई संवैधानिक चुनौतियों पर भी सुनवाई की थी।
2023 के कानून में क्या बदला था?
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून में चयन समिति में CJI की जगह केंद्रीय मंत्रिपरिषद के एक सदस्य को शामिल किया गया है। इसी व्यवस्था को चुनौती देते हुए याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थीं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने Anoop Baranwal मामले में संसद द्वारा कानून बनाए जाने तक CJI को शामिल करने वाली व्यवस्था तय की थी।
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