Last updated: October 30th, 2026 at 12:31 pm

दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बिहार की सियासत गरमा गई है। मोकामा विधायक अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक सरेंडर करने के निर्देश के बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उन पर निशाना साधा है। तेजस्वी ने जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार को भी घेरते हुए सवाल किया कि जब अनंत सिंह जेडीयू में थे, तब उनके आपराधिक इतिहास पर सवाल क्यों नहीं उठाए गए? वहीं, अनंत सिंह की आरजेडी में वापसी की अटकलों पर भी तेजस्वी ने अपना रुख साफ कर दिया।
‘तब अनंत सिंह अपराधी नहीं थे क्या?’
तेजस्वी यादव ने कहा कि जब अनंत सिंह जेडीयू में थे, तब नीरज कुमार ने उनके खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठाई? उस समय उनके आपराधिक इतिहास पर सवाल क्यों नहीं किए गए? तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा कि अब जब मामला अपने ऊपर आया तो याचिकाकर्ता बनकर उन्हें जेल भेजने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, इस बयान में एक अहम तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट में अनंत सिंह की जमानत रद्द कराने की याचिका दायर करने वाले नीरज कुमार, दुलारचंद यादव के पोते हैं। उन्हें जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार से अलग समझना चाहिए।
‘जब एनडीए में गए तो सरकार अच्छी लगने लगी’
तेजस्वी यादव ने अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी के पुराने बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले नीलम देवी आरोप लगाती थीं कि सरकार ने अनंत सिंह को फर्जी मुकदमों में फंसाया है। लेकिन जब अनंत सिंह आरजेडी के लोगों को धोखा देकर एनडीए सरकार में चले गए, तब उन्हें सरकार अच्छी लगने लगी। अब जब दोबारा जेल जाने की नौबत आई है तो सरकार खराब लगने लगी है।
क्या RJD में वापस आएंगे अनंत सिंह?
अनंत सिंह की आरजेडी में वापसी को लेकर जब तेजस्वी यादव से सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। उनके इस बयान से फिलहाल अनंत सिंह की आरजेडी में वापसी की अटकलों पर विराम लग गया है।
जेडीयू से निष्कासन के बाद बढ़ी थी राजनीतिक चर्चा
दरअसल, पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में अनंत सिंह ने जेडीयू के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय जन सुराज के प्रत्याशी अनुज कुमार सिंह का समर्थन किया था। इसके बाद जेडीयू ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
गौरतलब है कि दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने अनंत सिंह की जमानत रद्द कर दी है और उन्हें 1 दिसंबर 2026 तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है।
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