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रोहतास किले पर तिरंगा फहराने की पहल, विकास वैभव के नेतृत्व में बदली इलाके की तस्वीर

रोहतास: बिहार के रोहतास जिले में ऐतिहासिक रोहतास किले पर तिरंगा फहराने की घटना को प्रशासनिक दृढ़ता और साहसिक नेतृत्व
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रोहतास: बिहार के रोहतास जिले में ऐतिहासिक रोहतास किले पर तिरंगा फहराने की घटना को प्रशासनिक दृढ़ता और साहसिक नेतृत्व के उदाहरण के तौर पर याद किया जाता है। यह घटना 26 जनवरी 2009 की है, जब तत्कालीन रोहतास एसपी विकास वैभव के नेतृत्व में किले पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था।

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    उस समय रोहतास का इलाका नक्सली प्रभाव से प्रभावित माना जाता था। ऐसे माहौल में ऐतिहासिक किले पर तिरंगा फहराना केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों में सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति भरोसा मजबूत करने वाला कदम माना गया।

    ‘ऑपरेशन विध्वंस’ से कम हुआ नक्सली प्रभाव

    विकास वैभव के कार्यकाल के दौरान चलाए गए ‘ऑपरेशन विध्वंस’ का उद्देश्य नक्सली गतिविधियों के प्रभाव को कम करना और प्रभावित क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था को मजबूत करना था। अभियान के बाद दुर्गम पहाड़ी इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन की पहुंच बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए गए।

    इस पूरी प्रक्रिया का असर स्थानीय स्तर पर भी देखने को मिला। लोगों के बीच भय कम होने के साथ लोकतांत्रिक गतिविधियों और मतदान प्रक्रिया को सुचारू बनाने में मदद मिली।

    लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में कदम

    रोहतास किले पर तिरंगा फहराने की घटना को उस दौर में प्रशासन और स्थानीय समाज के बीच विश्वास बहाली से जोड़कर देखा गया। यह पहल इस संदेश का प्रतीक बनी कि संवेदनशील और दुर्गम इलाकों में भी मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति के जरिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।

    किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का दृश्य स्थानीय लोगों के लिए भी खास महत्व रखता था। इससे ऐतिहासिक स्थल और क्षेत्र के प्रति लोगों के जुड़ाव के साथ राष्ट्रीय भावना को भी बल मिला।

    नेतृत्व और प्रशासनिक दृढ़ता की मिसाल

    इस घटनाक्रम को विकास वैभव के प्रशासनिक कार्यकाल की उल्लेखनीय पहलों में गिना जाता है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने, लोगों का भरोसा बढ़ाने और लोकतांत्रिक गतिविधियों को सामान्य बनाने के प्रयासों ने प्रशासनिक नेतृत्व की भूमिका को सामने रखा।

    रोहतास किले से जुड़ी यह घटना आज भी इस बात की मिसाल के रूप में प्रस्तुत की जाती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और प्रभावी नेतृत्व से चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव की नींव रखी जा सकती है।

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