Last updated: July 18th, 2026 at 11:43 am

भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने एक नया इतिहास रच दिया है। देश के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1 ने श्रीहरिकोटा से सफल प्रक्षेपण के बाद अपने पेलोड को निर्धारित 450 किलोमीटर ऊंची कक्षा में स्थापित कर दिया। इस उपलब्धि के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काइरूट एयरोस्पेस की टीम से फोन पर बातचीत कर उन्हें बधाई दी और इसे भारत के स्पेस सेक्टर के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
प्रधानमंत्री ने स्काइरूट एयरोस्पेस के संस्थापक पवन चंदना, नागा भरत डाका और पूरी टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह सफलता देश के युवाओं को विज्ञान, नवाचार और अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने कहा कि पूरी टीम की युवा ऊर्जा भारत की सबसे बड़ी ताकत है।
पीएम मोदी ने कहा कि जब सरकार ने निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र के द्वार खोले थे, तब इस फैसले पर कई सवाल उठे थे। लेकिन आज Vikram-1 की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी भारत को वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में नई पहचान दिला रही है।
Vikram-1 मिशन को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अब तक भारत में ऑर्बिटल रॉकेट विकसित और लॉन्च करने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से ISRO के पास थी। इस मिशन की सफलता के साथ स्काइरूट एयरोस्पेस भारत की पहली निजी कंपनी बन गई है जिसने ऑर्बिटल रॉकेट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा।
इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जहां निजी क्षेत्र ने सफल ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया है। इसे भारतीय स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
गौरतलब है कि स्काइरूट एयरोस्पेस ने वर्ष 2022 में Vikram-S सब-ऑर्बिटल रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया था। अब Vikram-1 मिशन ने कंपनी को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है और भारत के निजी अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।
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