Last updated: November 4th, 2026 at 12:23 pm

बिहार में आईजी के निरीक्षण के दौरान अमर्यादित व्यवहार करने के आरोपों का सामना कर रहीं महिला पुलिस अधिकारी निर्मला कुमारी को बड़ी राहत मिली है। गृह विभाग ने उन्हें पहले दी गई विभागीय सजा से मुक्त कर दिया है। पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोबारा व्यक्तिगत सुनवाई की गई, जिसमें उनके पक्ष में उठाए गए बिंदुओं को विचारणीय माना गया। इसके बाद सरकार ने पूर्व में लगाए गए दंड को हटाने का फैसला लिया है।
निर्मला कुमारी पर आरोप था कि वर्ष 2017 में झंझारपुर एसडीपीओ रहते हुए उन्होंने निरीक्षण के दौरान दरभंगा के तत्कालीन आईजी के सामने अमर्यादित व्यवहार किया था। इस मामले में विभागीय जांच के बाद उनकी दो वेतन वृद्धि रोकने और निंदन का दंड दिया गया था। अब गृह विभाग ने उन्हें इस दंड से राहत देते हुए भविष्य में सतर्क रहने की हिदायत दी है।
2017 में आईजी के निरीक्षण के दौरान हुआ था विवाद
मामला 31 मार्च 2017 का है। उस दिन दरभंगा के आईजी ने झंझारपुर एसडीपीओ कार्यालय का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान मधुबनी के एसपी भी मौजूद थे। आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन एसडीपीओ निर्मला कुमारी ने निरीक्षण में सहयोग नहीं किया।
आईजी की ओर से कार्यालय की कमियों पर ध्यान देने का सुझाव दिए जाने के बाद निर्मला कुमारी कथित तौर पर ऊंची आवाज में बात करने लगीं। आरोप के मुताबिक, उन्होंने अपना सरकारी मोबाइल, कैप और कुछ अभिलेख भी फेंक दिए। उनके व्यवहार के कारण आईजी को निरीक्षण बीच में ही छोड़ना पड़ा था।
इस घटना के बाद दरभंगा आईजी ने डीजीपी से शिकायत की। डीजीपी के निर्देश पर आईजी मुख्यालय ने गृह विभाग को रिपोर्ट भेजी थी।
विभागीय जांच में सही पाए गए थे आरोप
शिकायत के बाद 13 सितंबर 2017 को निर्मला कुमारी से लिखित जवाब मांगा गया। उन्होंने अपने जवाब में सभी आरोपों को खारिज कर दिया। हालांकि, गृह विभाग उनके स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुआ और विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गई।
जांच के लिए तिरहुत के आईजी को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया। जांच अधिकारी ने आरोपों को सही पाया। इसके बाद गृह विभाग ने 8 जून 2021 को निर्मला कुमारी को निंदन और असंचयात्मक प्रभाव से दो वेतन वृद्धि रोकने का दंड दिया। निर्मला कुमारी ने इस फैसले के खिलाफ पुनरीक्षण आवेदन भी दिया, लेकिन सरकार ने उसे खारिज कर दिया। इसके बाद उन्होंने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोबारा हुई सुनवाई
पटना हाईकोर्ट ने 3 अगस्त 2026 को राज्य सरकार की ओर से दिए गए दंड को निरस्त कर दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि अधिकारी का पक्ष दोबारा सुना जाए। इसके बाद गृह विभाग ने नए सिरे से व्यक्तिगत सुनवाई की। इस दौरान निर्मला कुमारी की ओर से उठाए गए दो प्रमुख बिंदुओं पर विचार किया गया। पहला, निरीक्षण करने वाले आईजी की ओर से निरीक्षण प्रतिवेदन विधिवत जारी नहीं किया गया था। दूसरा, विभागीय कार्यवाही के दौरान निरीक्षण अधिकारी गवाही देने के लिए उपस्थित नहीं हुए थे।
सुनवाई में इन बिंदुओं को विचारणीय माना गया। साथ ही विभाग ने पाया कि पूरा मामला निरीक्षण के दौरान सामान्य शिष्टाचार में कमी से जुड़ा था। ऐसे में पहले दिया गया दंड घटना की प्रकृति के अनुपात में उचित नहीं था।
सरकार ने दंड हटाकर दी भविष्य में सतर्क रहने की हिदायत
दोबारा सुनवाई के बाद गृह विभाग ने निर्मला कुमारी को पहले दिए गए दंड से मुक्त करने का निर्णय लिया। हालांकि, सरकार ने उन्हें भविष्य में अपने व्यवहार और आचरण को लेकर सतर्क रहने की हिदायत दी है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि इस तरह की घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए।
निर्मला कुमारी फिलहाल बिहार स्वाभिमान विशेष सशस्त्र पुलिस, वाल्मीकिनगर में समादेष्टा के पद पर तैनात हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस मामले में दी गई हिदायत उनकी चरित्र पुस्तिका में दर्ज नहीं की जाएगी।इस फैसले के बाद करीब नौ साल पुराने विभागीय विवाद का निपटारा हो गया है और महिला पुलिस अधिकारी को बड़ी राहत मिली है।
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