Last updated: September 24th, 2026 at 02:58 pm

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में कथित अवैध धर्मांतरण से जुड़ा मामला सामने आया है। सैंया थाना क्षेत्र के जोधापुरा गांव में पुलिस ने चंगाई सभा के नाम पर लोगों को इकट्ठा कर धर्म परिवर्तन के लिए कथित तौर पर प्रेरित करने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक यह कार्रवाई 23 सितंबर को मिली सूचना के आधार पर की गई। मामले की जांच अब स्थानीय स्तर से आगे बढ़ाकर कथित नेटवर्क, फंडिंग और दूसरे राज्यों से जुड़े संपर्कों तक की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, जोधापुरा गांव में एक घर पर कई लोगों के जुटने की सूचना मिली थी। बताया गया कि लोगों को जन्मदिन की सभा या अन्य कार्यक्रम के बहाने बुलाया गया था। मौके पर पहुंची पुलिस ने वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की और चार संदिग्धों को हिरासत में लिया। बाद में उनके खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान जयपुर निवासी विनीत वेदी, धौलपुर निवासी बंटू उर्फ डोंगर सिंह, आगरा के खेरागढ़ क्षेत्र के मुखराज और सैंया क्षेत्र के प्रताप सिंह के रूप में बताई गई है। पुलिस के अनुसार इन लोगों से पूछताछ में धार्मिक सभाओं के आयोजन और लोगों को उनसे जोड़ने से संबंधित जानकारी मिली है। मामले में पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रत्येक व्यक्ति की कथित भूमिका क्या थी।
पुलिस का दावा है कि इन सभाओं में लोगों को बीमारी और पारिवारिक परेशानियां दूर होने का भरोसा दिया जाता था। इसके अलावा आर्थिक सहायता का लालच दिए जाने की बात भी जांच में सामने आने का दावा किया गया है। पुलिस के अनुसार, कथित धर्मांतरण से जुड़े लोगों और गतिविधियों का रिकॉर्ड डिजिटल माध्यम से रखा जाता था। हालांकि इन दावों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों से होगी।
जांच में डिजिटल संपर्कों का पहलू भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी आपस में Signal जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपर्क में थे। अधिकारियों ने डिजिटल संचार और ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि सभाओं के आयोजन और लोगों से संपर्क करने के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता था।
पुलिस के अनुसार कथित नेटवर्क में बड़ी संख्या में लोगों के जुड़े होने की जानकारी भी पूछताछ के दौरान मिली है। कुछ रिपोर्टों में 200 से अधिक लोगों के एक समूह से जुड़े होने की बात सामने आई है, जिनमें करीब 50 लोग आगरा क्षेत्र से बताए गए हैं। पुलिस अब यह सत्यापित कर रही है कि इस समूह में शामिल लोगों की वास्तविक भूमिका क्या थी और क्या वे किसी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल थे।
मामले में राजस्थान और उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों से संपर्क होने की भी जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार नेटवर्क के संभावित संपर्क मध्य प्रदेश, बिहार और पंजाब सहित कई राज्यों तक होने के संकेत मिले हैं। हालांकि इन राज्यों में मौजूद सभी लोगों को आरोपी मानना अभी उचित नहीं है। पुलिस की जांच यह निर्धारित करेगी कि किन लोगों की वास्तविक भूमिका थी और कौन केवल संपर्क में था।
फंडिंग को लेकर भी जांच शुरू की गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित गतिविधियों के लिए धन कहां से आता था और क्या किसी संगठन या व्यक्ति की ओर से आर्थिक सहायता दी जाती थी। इसके अलावा कथित तौर पर प्रशिक्षण या धार्मिक सामग्री उपलब्ध कराने वाले लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
पुलिस ने यह भी जांच शुरू की है कि जिन लोगों को इन सभाओं में बुलाया जाता था, उनसे किस तरह संपर्क किया जाता था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बीमारी, पारिवारिक समस्याओं और आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे लोगों को सभाओं में बुलाने की कोशिश की जाती थी। पुलिस अब ऐसे लोगों के बयान दर्ज कर मामले की वास्तविक स्थिति समझने का प्रयास कर रही है।
मामले में जांच एजेंसियां मौके से मिले दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में देख रही हैं। पुलिस के अनुसार कथित गतिविधियों से संबंधित जानकारी इलेक्ट्रॉनिक फाइलों में दर्ज होने की बात सामने आई है। इन रिकॉर्डों की जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किन लोगों से संपर्क किया गया और गतिविधियां किस तरह संचालित होती थीं।
आगरा पुलिस ने चारों गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है। जांच का अगला चरण कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों, फंडिंग के स्रोत और अलग-अलग राज्यों में मौजूद संपर्कों की पहचान करना है। पुलिस अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जांच के आधार पर आगे और कार्रवाई की जा सकती है।
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