Last updated: September 24th, 2026 at 02:59 pm

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में जबरन वसूली और लूट से जुड़े दो मामलों में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। विशेष जांच दल यानी SIT की जांच के बाद दो पुलिसकर्मियों समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, मामले में नामजद दो अन्य आरोपियों ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस के मुताबिक दोनों मामलों में अब तक पांच आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है।
मामला जलालपुर और सुरेरी थाना क्षेत्रों से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार जलालपुर थाने में पहला मुकदमा 17 सितंबर को दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 15 सितंबर को उसे जबरन एक वाहन में बैठाया गया, उसके साथ मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी देकर पैसे की मांग की गई। आरोप है कि इसके बाद उसके खाते से यूपीआई के माध्यम से करीब 2.15 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराए गए। इसके अलावा एटीएम से भी पैसे निकाले जाने की बात सामने आई है।
इस मामले में संकीत सिंह और विकास समेत कुछ अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। पुलिस की कार्रवाई के बाद दोनों भाइयों संकीत सिंह और विकास ने 23 सितंबर को अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत की प्रक्रिया के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
दूसरा मामला सुरेरी थाना क्षेत्र से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक शिकायतकर्ता को 13 सितंबर को मिलने के लिए बुलाया गया था। आरोप है कि इसके बाद सादे कपड़ों में मौजूद तीन-चार लोगों ने खुद को पुलिसकर्मी बताते हुए उसे वाहन में बैठाया और सुरेरी थाने ले गए। शिकायत के अनुसार उससे करीब 1.65 लाख रुपये की वसूली की गई और रकम का एक हिस्सा यूपीआई के जरिए दूसरे खाते में भेजा गया।
इस मामले की जांच के दौरान पुलिसकर्मियों की कथित भूमिका सामने आने के बाद विभागीय कार्रवाई भी की गई। सुरेरी थाने में तैनात रहे आरक्षी सत्येंद्र कुमार गौड़ और विष्णु सिंह को निलंबित किया गया था। SIT की जांच के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। उनके खिलाफ जबरन वसूली और लूट से संबंधित धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की जानकारी पुलिस ने दी है।
मामले में सुरेरी के तत्कालीन थानाध्यक्ष और उपनिरीक्षक दिव्य प्रकाश सिंह का नाम भी सामने आया है। उन्हें पहले ही निलंबित किया जा चुका है और पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच में जिन अन्य पुलिसकर्मियों या लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दोनों मामलों की गंभीरता को देखते हुए वाराणसी परिक्षेत्र के अधिकारियों ने पांच सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया था। SIT को घटनाओं से जुड़े भौतिक और तकनीकी साक्ष्य जुटाने तथा मामले की विस्तृत जांच करने की जिम्मेदारी दी गई। जांच में आरोपियों के बीच संपर्क, बैंक खातों में हुए लेनदेन और घटनाओं के दौरान इस्तेमाल किए गए वाहनों तथा मोबाइल फोन की जानकारी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पुलिस के अनुसार जांच में यह भी सामने आया कि कथित तौर पर पीड़ितों को धमकाने और उनसे पैसे लेने के लिए पुलिस की पहचान या पद का इस्तेमाल किया गया। हालांकि इन आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर होगा। गिरफ्तार किए गए पुलिसकर्मियों पर लगे आरोप अभी अदालत में साबित होना बाकी हैं।
जौनपुर पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह के अनुसार मामले में शामिल किसी भी पुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने आरोपी पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद उनकी सेवा से बर्खास्तगी से संबंधित विभागीय प्रक्रिया शुरू करने की भी जानकारी दी है।
पुलिस अब फरार बताए जा रहे तत्कालीन थानाध्यक्ष दिव्य प्रकाश सिंह की तलाश कर रही है। इसके अलावा जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों मामलों में आरोपियों का नेटवर्क कितना बड़ा था और क्या अन्य पुलिसकर्मी या बाहरी लोग भी कथित गतिविधियों में शामिल थे। पुलिस ने संकेत दिया है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
जौनपुर के दोनों मामलों की जांच जारी है। दो पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी, दो आरोपियों के अदालत में आत्मसमर्पण और तत्कालीन थानाध्यक्ष की तलाश के बाद मामले में पुलिस विभाग की भूमिका भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले दस्तावेजी, तकनीकी और प्रत्यक्ष साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
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