Last updated: July 17th, 2026 at 04:36 pm

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में चल रही डिजिटल भूमि अभिलेख (Digital Land Records) परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से सभी कार्य पूरे करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण किसानों, आम नागरिकों और निवेशकों के लिए पारदर्शी एवं सुविधाजनक व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राजस्व विभाग से जुड़ी सभी सेवाओं को अधिक से अधिक ऑनलाइन किया जाए ताकि लोगों को सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें.
समीक्षा बैठक में राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को परियोजना की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि कई जिलों में भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण तेजी से किया जा रहा है और पुराने रिकॉर्ड को आधुनिक डिजिटल प्रणाली में सुरक्षित रखा जा रहा है। इसके साथ ही नक्शों के डिजिटलीकरण और ऑनलाइन सत्यापन की प्रक्रिया को भी गति दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्य की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली लागू होने से भूमि विवादों में कमी आएगी और नागरिकों को खतौनी, नक्शा तथा अन्य दस्तावेज आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। उन्होंने निर्देश दिए कि रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया पारदर्शी हो और किसी भी प्रकार की त्रुटि मिलने पर उसका त्वरित समाधान किया जाए। साथ ही उन्होंने अधिकारियों को शिकायतों के निस्तारण के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश भी दिए।
मुख्यमंत्री ने निवेश और औद्योगिक विकास के दृष्टिकोण से भी इस परियोजना को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि स्पष्ट और प्रमाणित भूमि रिकॉर्ड होने से निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा तथा औद्योगिक परियोजनाओं को गति मिलेगी। इसके अलावा किसानों को बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं और अन्य राजस्व सेवाओं का लाभ प्राप्त करने में भी सुविधा होगी।
बैठक में आधुनिक तकनीक के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि रिकॉर्ड के डिजिटल संरक्षण के साथ साइबर सुरक्षा मानकों का भी पालन किया जा रहा है, ताकि महत्वपूर्ण दस्तावेज पूरी तरह सुरक्षित रहें। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक का उपयोग केवल सुविधा के लिए नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए भी किया जाना चाहिए।
राजस्व विशेषज्ञों का कहना है कि भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण से प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक सरल और प्रभावी होगी। इससे फर्जी दस्तावेजों और रिकॉर्ड में हेरफेर की संभावना कम होगी तथा भूमि संबंधी विवादों के समाधान में भी तेजी आएगी। उनका मानना है कि यदि परियोजना निर्धारित समयसीमा में पूरी होती है तो इसका लाभ करोड़ों लोगों को मिलेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने डिजिटल भूमि अभिलेख परियोजना को प्राथमिकता वाली योजनाओं में शामिल किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी जिलों में कार्य की नियमित समीक्षा की जाए और नागरिकों को समय पर डिजिटल सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए। सरकार का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद राज्य की राजस्व व्यवस्था अधिक पारदर्शी, आधुनिक और जनहितैषी बनेगी।
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